Bihar News: बिहार के बेतिया में कालीबाग थाना क्षेत्र के पुरानी गुदरी वार्ड नंबर 9 में एक लड़की ने आत्महत्या की कोशिश की. घर के अंदर फंदे से लटकी बेटी को देख परिजनों के होश उड़ गए, लेकिन उनकी तत्परता और आसपास के लोगों की मदद से समय रहते उसकी जान बचा ली गई.
कालीबाग के पुरानी गुदरी इलाके में स्वर्गीय परशुराम साह की बेटी दीपशिखा ने घर के भीतर फंदा लगा लिया. जैसे ही भाई-बहनों ने अपनी बहन को फंदे से लटकते देखा, घर में चीखें गूंजने लगीं. पूरा परिवार बिना एक पल गंवाए उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ा. स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में फंदा काटकर किशोरी को नीचे उतारा गया. हालांकि, तब तक उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी और वह बेसुध हो गई थी.
डॉक्टरों की टीम हाई अलर्ट पर
घटना के तुरंत बाद दीपशिखा को बेसुध हालत में बेतिया के जीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया. फिलहाल किशोरी की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उसे इमरजेंसी वार्ड में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है.
अस्पताल परिसर में दीपशिखा के चार भाइयों और तीन बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के सदस्यों को बस एक ही उम्मीद है कि उनकी बहन की सांसें एक बार फिर सामान्य हो जाएं.
पुलिस की जांच शुरू
दीपशिखा पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव के दौर से गुजर रही थी. पिता की मृत्यु के बाद से घर में वैसे ही उदासी का माहौल था, लेकिन दीपशिखा के मन में क्या चल रहा था, यह रहस्य अब भी बरकरार है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. क्या यह केवल डिप्रेशन का मामला है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह छिपी है, पुलिस हर एंगल से मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घर का कोई सदस्य अचानक गुमसुम रहने लगे या सामाजिक मेल-जोल कम कर दे, तो उसे अकेला न छोड़ें. बेतिया की यह घटना हमें याद दिलाती है कि समय पर की गई मदद किसी की जान बचा सकती है. पुलिस का कहना है कि किशोरी के होश में आने के बाद उसके बयान से ही सुसाइड की कोशिश की असली वजह साफ हो पाएगी. (इनपुट: सुनील कुमार सिंह)
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