Bihar Natural Farming: बिहार में किसान अब नए तरीके से खेती करेंगे. उनकी सुविधाओं को देखते हुए सरकार ने खास फैसला लिया है. राज्य में अब जलवायु अनुकूल खेती (Climate Friendly Farming) को बढ़ावा देने की तैयारी में है. इसके लिए वर्ल्ड बैंक और सरकार की एकसाथ सहभागिता से लगभग 4415 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे.
कृषि मंत्री ने दी जानकारी
जानकारी के मुताबिक, इससे 11 प्रखंडों के किसानों को फायदा हो सकेगा. इस मामले में जानकारी कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की ओर से दी गई. उन्होंने बताया कि बदलते जलवायु को देखते हुए खेती को अधिक सक्षम, टिकाऊ और जोखिम-प्रतिरोधी बनाने की जरूरत है. इसके लिए वर्ल्ड बैंक की 70 प्रतिशत और सरकार की 30 प्रतिशत सहभागिता होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को जलवायु के अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ना और मॉडर्न सिंचाई को जोड़ना जरूरी है. इसी को देखते हुए कृषि विभाग, जल संसाधन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग तीनों की ओर से मिलकर प्रयास किया जा रहा है. इस परियोजना को लेकर अलग-अलग घटकों का प्रभावी इंप्लीमेंटेशन किया जा रहा है.
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इन 4 घटकों पर किया जाएगा फोकस
- पहले घटक का सीधा फोकस किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर है. पुरानी सिंचाई प्रणालियों का पुनर्वास और आधुनिकीकरण किया जाएगा. सिंचाई सेवाओं के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के साथ जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर भी जोर रहेगा.
- दूसरा घटक बिहार की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल बाढ़ और नदी कटाव से जुड़ा है. तटबंधों और नदी किनारों को मजबूत किया जाएगा. साथ ही ब्लू और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बाढ़ और कटाव का असर कम करने के नए उपाय अपनाए जाएंगे.
- तीसरे घटक में जल संसाधन प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान होगा. कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ जल विज्ञान एवं कृषि सूचना सहायता केंद्र (एफएमआइएससी) को सुदृढ़ किया जाएगा. बिहार की अपनी जल नीति तैयार करने और जल नियामक प्राधिकरण के गठन की दिशा में भी काम होगा.
- चौथे घटक का फोकस परियोजना को सही तरीके से जमीन पर उतारने पर रहेगा. योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के साथ वित्तीय प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा, ताकि धन का सही इस्तेमाल हो और परियोजना के परिणामों पर लगातार नजर रखी जा सके.
इन 11 प्रखंडों को मिलेगा फायदा
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि 11 प्रखंडों को इसके लिए चिह्नित किया गया है. इनमें कोसी कमांड क्षेत्र के मधुबनी और गोपालगंज, सोन पश्चिमी कमांड क्षेत्र के रोहतास, सारण कमांड क्षेत्र के सीवान और बक्सर और कैमूर जिले से जुड़े प्रखंड शामिल हैं. सरकार के इस फैसले से किसानों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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