Bihar Government Action: बिहार में आम लोगों की समस्याओं को लंबे समय तक फाइलों में दबाकर रखने वाले अफसरों पर अब सरकार ने सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के बाद प्रशासनिक सिस्टम में जवाबदेही बढ़ाई जा रही है. सीएम ने पहले ही कह दिया था कि जनता से जुड़े मामलों का तय समय में समाधान हर हाल में होना चाहिए. इसी सख्ती का पहला बड़ा असर मुजफ्फरपुर में दिखा, जहां काम में लापरवाही के आरोप में कुढनी के राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है.
मुजफ्फरपुर में पहली बड़ी कार्रवाई
भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने साफ कहा है कि अब लापरवाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि विभाग में लगातार मिल रही शिकायतों और काम में ढिलाई को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है. मंत्री ने माना कि राजस्व विभाग पर भ्रष्टाचार और काम में देरी के सबसे ज्यादा आरोप लगते रहे हैं, इसलिए अब इस व्यवस्था को सख्ती से सुधारने की शुरुआत हो चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई होगी.
हड़ताल से रुके काम अब तेजी से निपटाने का दबाव
पिछले तीन महीनों की हड़ताल के कारण जमीन और राजस्व से जुड़े कई काम लंबित हो गए हैं. ऐसे में सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि अब दिन-रात मेहनत कर लंबित मामलों को तेजी से खत्म करना होगा. मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि जब मंत्री स्तर पर ईमानदारी से काम हो रहा है तो अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समय पर निभानी होगी. लापरवाही अब सीधे कार्रवाई की वजह बनेगी.
मुख्यमंत्री का 30 दिन वाला अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 मई को ही स्पष्ट कर दिया था कि जनता से जुड़ी किसी भी फाइल को 30 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. सरकार ने इसके लिए सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 भी शुरू किया है ताकि लोग अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकें. मुख्यमंत्री ने दोबारा कहा है कि फाइलें अटकाने या भटकाने की संस्कृति अब नहीं चलेगी.
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कोर्ट वाले मामलों में भी तय समय सीमा
सरकार ने न्यायालय से जुड़े मामलों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. ऐसे मामलों में 10वें, 20वें और 25वें दिन अधिकारियों को नोटिस भेजी जाएगी. अगर तय समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारी खुद को निलंबन के लिए तैयार मानें. सरकार का मकसद साफ है कि जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें और समय पर समाधान मिले.
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