Bihar News:(आशुतोष पाण्डेय) भाकपा-माले बिहार इकाई के 12वें राज्य सम्मेलन में बुलडोजर राजनीति और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया. यह सम्मेलन दरभंगा के रेणु-नागार्जुन नगर स्थित लहेरियासराय सभागार में आयोजित हो रहा है. सम्मेलन के तीसरे और अंतिम दिन विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई.
साथियों की स्मृति को समर्पित सम्मेलन
भाकपा-माले नगर कमिटी सदस्य रणधीर राणा ने बताया कि यह राज्य सम्मेलन साथी राजाराम, रामदेव वर्मा और लक्ष्मी पासवान की स्मृति को समर्पित है. सम्मेलन की शुरुआत लघु मार्च और महागठबंधन दलों के नेताओं के संबोधन के साथ हुई. इसके बाद प्रतिनिधि सत्र में निवर्तमान राज्य समिति की रिपोर्ट पर राज्यभर से आए 700 से अधिक प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों ने चर्चा की.
सांस्कृतिक विरासत से जुड़े साहित्य का विमोचन
सम्मेलन के दौरान 1970-80 के दशक में भोजपुर के माकपा (एमएल) आंदोलन से जुड़े सांस्कृतिक समर्थक स्वर्गीय कॉमरेड सुरेंद्र प्रसाद के लेखन संग्रह तथा बिजेंद्र अनिल की कहानियों के संग्रह का भी विमोचन किया गया.
देश संविधान से चलता है, बुलडोजर से नहीं
भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, बुलडोजर से नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई के जरिए गरीबों, भूमिहीनों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने बिहार में ‘बुलडोजर बनाम भूमि-अधिकार’ की लड़ाई को तेज करने और व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया.
वोट और अधिकार बचाने की अपील
महासचिव ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आम जनता को जागरूक होना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और जीवित लोगों को मृत घोषित करने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने लोगों से अपने वोट और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने की अपील की.
सामाजिक संगठनों से भी हुई बातचीत
सम्मेलन के दौरान भाजपा की कथित ‘बुलडोजर राजनीति’ के खिलाफ आंदोलन चला रहे यूनियनों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ प्रतिनिधियों की बातचीत भी हुई. सम्मेलन के अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा जारी रहने की संभावना जताई गई.
