बिहार के Gen Z युवा का अमेरिका में Startup Dream, 2 साल माता-पिता से नहीं मिला, 20 किलो बढ़ा वजन

बिहार के Gen Z टेक युवा उत्कर्ष नंदा का अमेरिका में Startup बनाने के संघर्ष का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी बनाने के दौरान वह 2 साल से अधिक समय तक माता-पिता से नहीं मिल सके और उनका वजन 20 किलो से ज्यादा बढ़ गया.

Bihari Gen z Startup Dream Story : अमेरिका में रहकर Startup कंपनी बनाने की कोशिश कर रहे भारतीय टेक संस्थापक उत्कर्ष नंदा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में उन्होंने Startup खड़ा करने के दौरान सामने आने वाली व्यक्तिगत और मानसिक परेशानियों को साझा किया है. उन्होंने बताया कि कंपनी बनाने के जुनून में उन्हें लंबे समय तक एक छोटे से कमरे में अकेले घंटों काम करना पड़ा. यहां तक कि वह दो साल से अधिक समय से अपने माता-पिता से भी नहीं मिल सके.

Startup के चक्कर में 20 किलो बढ़ा वजन

उत्कर्ष नंदा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कंपनी बनाने के दौरान उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गयी. लगातार काम करने, कम शारीरिक गतिविधि और अस्वस्थ आदतों के कारण उनका वजन 20 किलोग्राम से अधिक बढ़ गया. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस दौरान वह काफी ज्यादा सोडा पीने लगे थे.

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अपने संघर्ष को बताते हुए लिखा, "केवल 10 लाख डॉलर का निवेश ही मेरी आत्मा को बचा सकता है." उनके इस पोस्ट के बाद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी और Startup की दुनिया में सफलता के पीछे छिपे संघर्ष पर चर्चा शुरू हो गयी.

बना रहे हैं AI और सोशल नेटवर्क का नया प्लेटफॉर्म

जब एक यूजर ने उनसे पूछा कि वह आखिर बना क्या रहे हैं, तो नंदा ने अपने प्लेटफॉर्म TryMindHub.com के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका प्लेटफॉर्म लोगों को AI से पूछे गये सवालों को कैनवास पर बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने और लगातार बढ़ने वाला ज्ञान भंडार तैयार करने में मदद करता है.

उन्होंने बताया कि आगे चलकर AI से जुड़े सवालों के आधार पर एक सोशल नेटवर्क बनाने की योजना है. उन्होंने इसे ChatGPT और LinkedIn के मिश्रण जैसा प्लेटफॉर्म बताया.

Gen Z युवाओं ने कहा- 'भैया, इतना सच नहीं बोलना था'

नंदा के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आयीं. एक यूजर ने लिखा, "यह बात इतनी प्रासंगिक क्यों लग रही है?" वहीं दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, "भैया, इतना सच नहीं बोलना था."

एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि जब वह 10 लाख डॉलर के Startup का नेतृत्व कर रहे हैं, तो इतनी परेशानी क्यों है. इस पर नंदा ने जवाब दिया कि वे जल्द ही बड़ा धमाका करने वाले हैं.

सफलता के पीछे की कीमत पर छिड़ी बहस

उत्कर्ष नंदा की कहानी ने Startup और टेक जगत में सफलता के पीछे चुकाई जाने वाली व्यक्तिगत कीमत पर बहस छेड़ दी है. खासकर Gen Z और युवा उद्यमियों के बीच यह चर्चा तेज हुई है कि कंपनी बनाने की दौड़ में करियर के साथ परिवार, स्वास्थ्य और निजी जिंदगी का संतुलन कितना जरूरी है.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नंदा के संघर्ष को Startup बनाने की वास्तविक तस्वीर बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने युवाओं को सफलता के साथ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी.

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By विवेक सिंह

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उन्होंने मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

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