Bihar Flood : बाढ़ में तबाह हो गई घर-गृहस्थी? सरकार देगी मुआवजा, जानिए किस नुकसान पर कितनी मिलेगी मदद

Bihar Flood Relief 2026: बाढ़ से 18 जिलों में लाखों लोग प्रभावित हैं. घर, फसल और पशुओं को नुकसान हुआ है. जानिए नुकसान होने पर सरकारी मदद कैसे मिलती है?

बिहार में गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. राज्य के 18 जिलों तक बाढ़ का असर पहुंच चुका है और 6.65 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. लोगों का घर-बार उजड़ गया है, फसलें बर्बाद हो गई हैं और पशुओं को भी नुकसान हुआ है. ऐसे में प्रभावित परिवारों को इस मुश्किल से उबरने के लिए सरकारी मदद की जरूरत है. राज्य सरकार बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहत और मुआवजा देती है.

यहां सवाल ये है कि किस नुकसान पर कितनी मदद मिलती है? पैसा किसे मिलता है और बैंक खाते में कैसे पहुंचता है? जानिए बाढ़ में घर, फसल या पशुओं को नुकसान होने पर सरकार से कितनी मदद मिल सकती है और मुआवजे के लिए क्या करना होगा.

बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कैसे मिलता है मुआवजा

  • मुआवजा के लिए सबसे जरूरी है, बाढ़ से हुए नुकसान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हों.
  • इसके लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से सर्वे कराया जाता है. घर को कितना नुकसान हुआ, फसल कितनी खराब हुई और पशुओं को कितना नुकसान पहुंचा, इसकी सारी जानकारी जुटाई जाती है.
  • अगर आपके घर में बाढ़ का पानी घुसा है या मकान क्षतिग्रस्त हुआ है तो स्थानीय प्रशासन, अंचल कार्यालय या पंचायत स्तर पर इसकी जानकारी देना जरूरी है ताकि नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा मिल सके.

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बाढ़ मुआवजा वाला पैसा खाते में कैसे आएगा?

सरकारी सर्वे पूरा होने के बाद मुआवजा लेने वाले परिवारों की सूची तैयार की जाती है. इसके बाद इसे वेरिफाई किया जाता है. वेरिफाई और मंजूरी के बाद पहले निर्राधारित राशि लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी यानी सीधे बैंक खाते में पैसे भेजी जाती है.

अभी क्या करें बाढ़ पीड़ित?

  • अगर बाढ़ में आपका घर, फसल या पशु प्रभावित हुआ है तो सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दें. अंचल या प्रखंड कार्यालय में संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि नुकसान सर्वे में दर्ज हो.
  • घर के नुकसान की स्थिति में मकान की तस्वीरें और उपलब्ध दस्तावेज संभालकर रखें. फसल और पशुओं के नुकसान की जानकारी भी अलग-अलग दें.
  • सहायता नुकसान की श्रेणी, सरकारी सर्वे और उस समय लागू राहत नियमों के आधार पर तय होती है. इसलिए सोशल मीडिया या दूसरी जगह चल रही किसी भी रकम को अंतिम सरकारी मुआवजा मानने से पहले प्रशासन से पुष्टि करना जरूरी है.

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By गौतम कुमार

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