छपरा में घर डूबे तो पिकअप और टेंट बने आशियाना; सत्तू खाकर गुजारा

VIDEO: छपरा में बाढ़ की तस्वीर देख कांप उठेगा दिल, घर डूबे तो पिकअप बना आशियाना; सत्तू खाकर कट रही जिंदगी

छपरा में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है. आर्यन नगर से दिलिया रहीमपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं. लोगों के घर पानी में डूब गए हैं, जिससे वे पिकअप वैन और अस्थायी टेंट में रहने को मजबूर हैं. भोजन और पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है.

Chhapra Flood : छपरा में बाढ़ ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी है. शहर के आर्यन नगर मोहल्ले से लेकर दिलिया रहीमपुर पंचायत तक कई इलाकों में पानी फैल गया है. हालात ऐसे हैं कि जिन लोगों के घर पानी में डूब चुके हैं, उन्हें अपना घर छोड़कर सड़क किनारे, पिकअप वाहन और अस्थायी टेंट के सहारे जिंदगी गुजारनी पड़ रही है. कहीं पिकअप के ऊपर त्रिपाल लगाकर परिवार रह रहा है तो कहीं शादी-ब्याह में इस्तेमाल होने वाले साउंड सिस्टम के ऊपर लोगों ने सोने का इंतजाम किया है.

आर्यन नगर में घर डूबे तो पिकअप बना आशियाना

आर्यन नगर मोहल्ले में साधु लाल स्कूल के आसपास के कई घर बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं. जलस्तर बढ़ने के बाद नदी का पानी सड़कों तक पहुंच गया है. घरों में पानी भरने के कारण लोग जरूरी सामान लेकर बाहर निकलने को मजबूर हैं.

स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का जलस्तर पिछले करीब चार दिनों से तेजी से बढ़ रहा है. अचानक बढ़ते पानी के कारण लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि घर से कौन सा जरूरी सामान पहले निकाला जाए. इस आपाधापी में कई लोगों का सामान घर में ही छूट गया.

घर डूबने के बाद कुछ परिवारों ने पिकअप वाहन को ही अपना अस्थायी आशियाना बना लिया है. पिकअप के ऊपर त्रिपाल लगाकर उसके नीचे खाना बनाने और रहने का इंतजाम किया गया है. वहीं, आसपास कुछ लोग टेंट और दूसरे अस्थायी साधनों के सहारे रात गुजार रहे हैं.

सत्तू खाकर गुजारा, खाने-पीने की भी परेशानी

बाढ़ पीड़ितों के सामने रहने के साथ-साथ भोजन और पीने के पानी की भी गंभीर समस्या है. स्थानीय लोगों के मुताबिक घर में रखा अनाज और खाना भीग चुका है. ऐसे में कई परिवार सत्तू घोलकर किसी तरह अपना पेट भर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ भले ही कुछ दिनों या कुछ सप्ताह तक रहे, लेकिन इसका असर पूरे साल की मेहनत पर पड़ता है. घर डूबने के साथ सामान, अनाज और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी प्रभावित होती हैं.

शौचालय डूबे, महिलाओं और बच्चों की बढ़ी परेशानी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी समस्याओं में शौचालय की व्यवस्था भी शामिल है. घरों के शौचालय पानी में डूब चुके हैं और चारों तरफ पानी जमा होने के कारण लोगों के लिए बाहर जाना भी मुश्किल है.

स्थानीय निवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि आसपास के स्कूलों को अस्थायी रूप से खोला जाए, ताकि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए शौच की व्यवस्था हो सके. लोगों का कहना है कि बाढ़ के बीच यह समस्या ऐसी है, जिसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करना भी उन्हें असहज लगता है, लेकिन मौजूदा हालात में कोई विकल्प नहीं है.

प्रशासन से मदद की उम्मीद, अभी तक नहीं मिली ठोस राहत

बाढ़ पीड़ितों के अनुसार प्रशासन की ओर से अधिकारियों के आने और स्थिति का जायजा लेने की बात हुई है. कुछ लोगों को त्रिपाल और सूखा राशन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी मिला है. कम्युनिटी किचन शुरू करने की भी चर्चा हुई है.

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा. जिन परिवारों के घर पूरी तरह डूब चुके हैं, उन्हें तत्काल भोजन, पीने का पानी, शौचालय और सुरक्षित रहने की जगह की जरूरत है.

रंजन महतो बोले- पड़ोसी के यहां लेनी पड़ी शरण

बाढ़ से प्रभावित स्थानीय निवासी रंजन महतो ने बताया कि उनका घर पूरी तरह पानी में डूब चुका है. फिलहाल वह पड़ोसी के घर में रह रहे हैं. घर का सामान अंदर ही रह गया है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में काफी परेशानी हो रही है.

उन्होंने बताया कि मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाते हैं, लेकिन बाढ़ के कारण काम और रहने दोनों की समस्या पैदा हो गई है. रात में बिजली की सुविधा भी प्रभावित होने के कारण लोगों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है.

दिलिया रहीमपुर में खेत बने जलाशय, नाव से पहुंच रहे लोग

आर्यन नगर से आगे दिलिया रहीमपुर पंचायत के इलाकों में स्थिति और गंभीर नजर आ रही है. शहर से सटे इस इलाके में कभी जिन जगहों पर खेत थे, वहां अब नाव चल रही है. पिछले पांच-सात दिनों में पानी बढ़ने के बाद कई घर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक निचले इलाकों में लगभग सभी घर बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं. जिन परिवारों के पास बाहर निकलने का विकल्प था, वे सड़क किनारे आकर रहने लगे हैं. कई लोग त्रिपाल लगाकर तो कई दूसरे अस्थायी साधनों के सहारे दिन और रात गुजार रहे हैं.

बिजली के पोल तक डूबे, सड़क पर रहने को मजबूर परिवार

जलमग्न इलाके में पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि बिजली के पोल का काफी हिस्सा पानी में डूबा नजर आ रहा है. जिन जगहों पर कभी लोग खेती करते थे, वहां अब नाव से आवागमन हो रहा है.

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से बाहर निकलकर सड़क या ऊंची जगहों पर रहने को मजबूर हैं. लोगों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों तक जल्द से जल्द राहत सामग्री पहुंचाए और उनके रहने के लिए सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था करे.

बाढ़ पीड़ितों की प्रशासन से गुहार

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ से पहले तैयारियों और राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई परिवार अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं.

बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से तत्काल कम्युनिटी किचन शुरू करने, सूखा राशन और पीने का पानी उपलब्ध कराने, पर्याप्त त्रिपाल देने तथा अस्थायी शौचालय की व्यवस्था कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि जब तक पानी कम नहीं होता, तब तक उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रहने की सुविधा मिलना जरूरी है.

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लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

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