Bihar Fisheries Scheme: बिहार में मछुआरों की बल्ले-बल्ले, अब सिर्फ 10% खर्च पर मिलेगी सब्सिडी, जाने कैसे करें अप्लाई

Bihar Fisheries Scheme: बिहार के मछुआरों के लिए साल के अंतिम दिनों में बड़ी राहत की खबर है. रोजगार और आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ऐसी योजना शुरू की है, जिसमें नाव और जाल की खरीद पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. खास बात यह है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है.

Bihar Fisheries Scheme: बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए नाव एवं जाल पैकेज वितरण योजना को लागू किया है.

इस योजना के तहत परंपरागत मछुआरों और मत्स्यजीवी सहयोग समितियों से जुड़े सदस्यों को नाव और जाल खरीदने के लिए भारी अनुदान दिया जा रहा है. योग्य लाभार्थी 31 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

क्या है नाव एवं जाल पैकेज वितरण योजना

यह योजना खास तौर पर उन मछुआरों के लिए लाई गई है, जो लंबे समय से मछली शिकार को ही अपनी आजीविका का साधन बनाए हुए हैं. सरकार इस योजना के तहत नाव और जाल की तय लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करेगी. इससे मछुआरों को आधुनिक संसाधन मिलेंगे और उनका काम आसान होगा.

Bihar Fisheries Scheme

इस योजना का लाभ परंपरागत मछुआरों के साथ-साथ महिला मछुआरों और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के मछुआरों को भी मिलेगा. राज्य के सभी जिलों के वे मछुआरे आवेदन कर सकते हैं, जो मत्स्य शिकारमाही कार्य से जुड़े हैं और राज्य मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्य हैं या इसके पात्र हैं.

एक परिवार को मिलेगा एक ही पैकेज

योजना के तहत एक व्यक्ति या एक परिवार को केवल एक ही पैकेज का लाभ दिया जाएगा. इसमें फिशिंग वुडन बोट पैकेज, फिशिंग एफआरपी बोट पैकेज और कॉस्ट यानी फेका जाल पैकेज शामिल हैं. लाभुक अपनी जरूरत के अनुसार इनमें से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं.

फिशिंग वुडन बोट पैकेज की इकाई लागत 1 लाख 24 हजार 400 रुपये तय की गई है. वहीं एफआरपी बोट पैकेज के लिए 1 लाख 54 हजार 400 रुपये और कॉस्ट जाल पैकेज के लिए 16 हजार 700 रुपये की लागत निर्धारित की गई है. इस पूरी राशि में से 90 प्रतिशत अनुदान सरकार देगी.

आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को 31 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा. http://fisheries.bihar.gov.in/ वेबसाइट पर आवेदन के दौरान मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड और मत्स्य शिकारमाही से जुड़े प्रमाण अपलोड करना अनिवार्य है. लाभुकों का चयन उप मत्स्य निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा.

सरकार का मानना है कि इस योजना से मछुआरों को आधुनिक साधन मिलेंगे, जिससे उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होगी. यह पहल मछुआरा समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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