Bihar Diwas 2026: बिहार दिवस के भव्य आयोजन का समापन एक ऐसी शाम के साथ हुआ, जिसे पटना लंबे समय तक याद रखेगा. राजधानी के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने अपनी भरतनाट्यम प्रस्तुति से न केवल समां बांधा, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और कला के अद्भुत संगम का परिचय दिया.
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उनकी ‘शक्ति अराधना’ ने पूरे सभागार को भक्ति और देशभक्ति के रस में सराबोर कर दिया.
मां दुर्गा को समर्पित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर डॉ. विजयलक्ष्मी ने मां दुर्गा को समर्पित विशेष प्रस्तुति दी. उनकी एकल नृत्य प्रस्तुति ‘श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम’ पर आधारित थी, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी. इसके बाद अंबा स्तुति और दुर्गा स्तुति की अभिव्यक्ति ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया.
डॉ. एन विजयलक्ष्मी का व्यक्तित्व भारतीय लोक सेवा में एक मिसाल की तरह है. जहां दिन भर वे राज्य के विकास की बड़ी फाइलों और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझती हैं, वहीं शाम होते ही उनकी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता उन्हें कला के मंच पर ले आती है.
बचपन से ही भरतनाट्यम के प्रति गहरा रुझान रखने वाली डॉ. विजयलक्ष्मी ने अपने व्यस्ततम दायित्वों के बीच भी इस शास्त्रीय साधना को जीवित रखा है. उनकी प्रस्तुति में दिखने वाली गरिमा और लय ने यह साबित कर दिया कि एक कुशल लोक सेवक के भीतर एक संवेदनशील कलाकार भी निवास करता है.
चैत्र नवरात्रि पर ‘आदि शक्ति’ की वंदना और सम्मोहक नृत्य
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर डॉ. विजयलक्ष्मी ने मां दुर्गा को समर्पित एक विशेष एकल नृत्य प्रस्तुत किया. आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम’ पर आधारित उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराया.
इसके बाद अंबा स्तुति और मां दुर्गा स्तुति की प्रस्तुति के दौरान उनके पदचाप और हस्तमुद्राओं ने ‘शक्ति उपासना’ के साक्षात दर्शन कराए. हॉल में मौजूद हजारों दर्शक इस भक्तिमय वातावरण में इस कदर खो गए कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ और देशभक्ति का जज्बा
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दी गई विशेष समूह प्रस्तुति रही. डॉ. विजयलक्ष्मी ने न केवल इसमें स्वयं प्रतिभाग किया, बल्कि अपने साथी कलाकारों का मार्गदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को नृत्य के माध्यम से जीवंत कर दिया.
यह प्रस्तुति कला प्रेम और राष्ट्र प्रेम का एक नायाब उदाहरण थी. उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी वे राजगीर महोत्सव और बुद्ध महोत्सव जैसे मंचों पर बिहार की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला चुकी हैं.
डॉ. विजयलक्ष्मी इससे पहले भी बुद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव और बिहार दिवस जैसे कई बड़े आयोजनों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दे चुकी हैं. पिछले वर्ष यशोधरा पर आधारित उनकी प्रस्तुति ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था. उनके प्रयासों से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल रही है.
Also Read: जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह एक्टिव, माता का आशीर्वाद लेने निकले, बोले- चुनाव नहीं लड़ेंगे
