2027 तक सब क्लियर: उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे पर प्लान 'लास्ट चांस' किया लॉक

Bihar Bhumi:पटना स्थित विभागीय कार्यालय में सर्वेक्षण कार्यों की समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि सर्वे औपचारिकता नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं के स्थायी समाधान का आधार है. उन्होंने चेतावनी दी कि गलत रिपोर्टिंग, अनावश्यक देरी या लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई तय है.

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.

2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर

विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे.

उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं.

पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं.

जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश

भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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