Bihar Bhumi: उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आदेश के बाद एक्शन मोड में प्रशासन, राजस्व मामलों के लिए तय हुई नई डेडलाइन
Bihar Bhumi: जनता की शिकायतें फाइलों में दबें नहीं, बल्कि तय समय में जमीन पर उतरें. इसी मकसद से उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने राजस्व और भूमि सुधार व्यवस्था को लेकर बड़ा एक्शन लिया है.
Bihar Bhumi: बिहार में भूमि विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासनिक सख्ती साफ नजर आने लगी है. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के निर्देश के बाद सोमवार को समीक्षा भवन में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अहम बैठक हुई.
इस बैठक में भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम में आए 2,613 आवेदनों के निष्पादन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए और लंबित मामलों को तय समयसीमा में निपटाने का रोडमैप तैयार किया गया.
जन संवाद के आवेदनों पर फोकस, वर्गवार होगा निपटारा
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम में प्राप्त सभी 2,613 आवेदनों को उनकी गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत कर पोर्टल पर अपलोड किया जाए. प्रशासन का मानना है कि इससे सामान्य और जटिल मामलों की पहचान आसान होगी और प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन संभव हो सकेगा.
डीएम ने साफ कहा कि सामान्य मामलों में किसी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उनका तुरंत समाधान होना चाहिए.
11 जनवरी तक लंबित राजस्व मामलों को निपटाने का अल्टीमेटम
राजस्व विभाग से जुड़े सभी लंबित कार्यों को 11 जनवरी तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है. बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब फाइलें आगे-पीछे करने का दौर खत्म होगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर संदेश साफ है कि समयसीमा का उल्लंघन सीधे कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करेगा.
भू-माफिया पर नजर, रजिस्ट्री डेटा से होगी पहचान
बैठक में एक अहम फैसला यह भी लिया गया कि अपर निबंधन पदाधिकारी के कार्यालय से पिछले तीन-चार वर्षों में हुई जमीन रजिस्ट्रियों की सूची मंगाई जाएगी. जिन लोगों द्वारा बार-बार जमीन की खरीद-बिक्री की जा रही है, उन्हें चिह्नित कर भू-माफिया के रूप में जांच के दायरे में लाया जाएगा. इससे अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश होगी.
जटिल मामलों में एसडीओ-एसडीपीओ की भूमिका बढ़ी
जमीन से जुड़े जटिल मामलों के निष्पादन की जिम्मेदारी एसडीओ और एसडीपीओ को सौंपी गई है, जबकि सीओ और डीसीएलआर को उन पर आदेश पारित करना होगा. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा द्वारा की गई सुनवाई से जुड़े मामलों को एक सप्ताह के भीतर निष्पादित करने का स्पष्ट निर्देश भी दिया गया.
रैंकिंग के जरिए अंचलों पर दबाव
राज्यस्तरीय रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाले अंचलाधिकारियों को चेतावनी दी गई है. प्रशासन चाहता है कि 200 से ऊपर रैंक वाले अंचल 50 के भीतर पहुंचने का प्रयास करें, जबकि 200 से नीचे रहने वाले अंचल अपनी रैंक 200 से ऊपर ले जाएं. यह व्यवस्था अब प्रदर्शन आधारित निगरानी का संकेत दे रही है.
जिला प्रशासन की यह पहल साफ संकेत देती है कि भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में अब ढिलाई नहीं चलेगी. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आदेश के बाद बनी यह नई रणनीति आम लोगों को समय पर न्याय दिलाने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
