PHOTOS: बिहार के ये 10 ऐतिहासिक स्थल, जहां आज भी जिंदा है हजारों साल पुराना इतिहास, एक बार जरूर घूमिए

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PHOTOS: बिहार के ये 10 ऐतिहासिक स्थल, जहां आज भी जिंदा है हजारों साल पुराना इतिहास, एक बार जरूर घूमिए
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AI जनरेटेड तस्वीर

Bihar 10 Historical Places: बिहार सिर्फ राजनीति और खबरों के लिए नहीं, बल्कि अपने हजारों साल पुराने इतिहास के लिए भी खास है. यहां ऐसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जहां आज भी मौर्य, गुप्त, बौद्ध और जैन काल की विरासत दिखाई देती है. आइए जानते हैं बिहार की 10 ऐसी ऐतिहासिक जगहों के बारे में, जहां एक बार जरूर घूमना चाहिए.

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रोहतासगढ़ फोर्ट की तस्वीर

रोहतासगढ़ किला: पहाड़ पर बसा ऐतिहासिक किला

रोहतास जिले में स्थित रोहतासगढ़ किला बिहार के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है. पहाड़ी पर बने इस विशाल किले की वास्तुकला और प्राकृतिक स्थिति पर्यटकों को आकर्षित करती है. इसके निर्माण को लेकर कई ऐतिहासिक और लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. किले तक पहुंचने का रास्ता और यहां से दिखने वाला प्राकृतिक नजारा इसे खास बनाता है.

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नालंदा यूनिवर्सिटी के अंदर की तस्वीर

नालंदा: जहां दुनिया भर से पढ़ने आते थे विद्यार्थी

नालंदा का नाम सुनते ही प्राचीन शिक्षा व्यवस्था की याद आती है. यहां स्थित प्राचीन नालंदा महाविहार कभी दुनिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था. दूर-दूर से विद्यार्थी यहां अध्ययन करने आते थे. आज इसके अवशेष बिहार के गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाते हैं.

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बोधगया की तस्वीर

गया: आस्था और इतिहास का संगम

फल्गु नदी के किनारे बसा 'गया' बिहार का प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक शहर है. पितृपक्ष के दौरान यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पिंडदान के लिए पहुंचते हैं. विष्णुपद मंदिर इस शहर के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है. गया की पहचान धार्मिक आस्था के साथ-साथ इसकी प्राचीन विरासत से भी जुड़ी है.

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राजगीर स्थित ग्लास ब्रिज की तस्वीर

राजगीर: बुद्ध और महावीर की यादों से जुड़ी धरती

राजगीर बिहार के उन स्थानों में है, जहां बौद्ध और जैन दोनों धर्मों की महत्वपूर्ण विरासत देखने को मिलती है. माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां काफी समय बिताया था. भगवान महावीर का जीवन भी इस क्षेत्र से जुड़ा रहा है. पहाड़ियों से घिरा राजगीर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है.

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वैशाली प्राचीन गणराज्य की धरती

वैशाली: प्राचीन गणराज्य की धरती

वैशाली का इतिहास बौद्ध और जैन धर्म के साथ गहराई से जुड़ा है. माना जाता है कि भगवान बुद्ध का इस क्षेत्र में कई बार आगमन हुआ था. जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर का जन्म भी वैशाली क्षेत्र में हुआ था. प्राचीन वैशाली को भारत की शुरुआती गणतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक के लिए भी जाना जाता है.

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मधुबनी स्थित राजनगर पैलेस की तस्वीर

राजनगर पैलेस: मधुबनी की शाही विरासत

मधुबनी जिले में स्थित राजनगर पैलेस बिहार की ऐतिहासिक शाही विरासत की झलक दिखाता है. इसका निर्माण दरभंगा राज परिवार से जुड़े महाराजा रामेश्वर सिंह के समय कराया गया था. परिसर में कई ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों के अवशेष देखने को मिलते हैं. इसकी पुरानी वास्तुकला इतिहास और विरासत में रुचि रखने वालों को खास तौर पर आकर्षित करती है.

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पावापुरी स्थित जल मंदिर

पावापुरी: जहां महावीर को मिला निर्वाण

नालंदा जिले का पावापुरी जैन धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. मान्यता है कि भगवान महावीर ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था. यहां स्थित जल मंदिर बेहद प्रसिद्ध है और पानी के बीच बना होने के कारण इसकी खूबसूरती अलग ही नजर आती है. धार्मिक आस्था के साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी काफी बड़ा है.

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झील के बीच स्थित शेर शाह सूरी का मकबरा

शेर शाह सूरी का मकबरा: झील के बीच शानदार इमारत

सासाराम में स्थित शेर शाह सूरी का मकबरा बिहार की प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है. इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में कराया गया था. विशाल जलाशय के बीच बना यह मकबरा भारतीय-इस्लामी वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है. इसकी भव्यता और स्थापत्य कला आज भी पर्यटकों को आकर्षित करती है.

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जहानाबाद स्थित बराबर की गुफा

बराबर की गुफाएं: चट्टानों में छिपा मौर्यकालीन इतिहास

जहानाबाद जिले की बराबर पहाड़ियों में बनी गुफाएं भारत की सबसे प्राचीन शैल-कट गुफाओं में शामिल हैं. इनका संबंध मुख्य रूप से मौर्य काल से माना जाता है. गुफाओं की चिकनी दीवारें और पत्थरों को काटकर बनाई गई संरचना प्राचीन स्थापत्य कला की अद्भुत मिसाल है. यहां मौजूद शिलालेख उस दौर के इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं.

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गोलघर की तस्वीर

गोलघर: पटना की पहचान और अकाल की कहानी

पटना के गांधी मैदान के पास स्थित गोलघर बिहार की राजधानी की सबसे पहचान वाली ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में अनाज भंडारण के लिए कराया गया था. इसकी गोलाकार संरचना और ऊंचाई इसे दूसरी इमारतों से अलग बनाती है. ऊपर पहुंचने पर पटना शहर का शानदार नजारा भी देखने को मिलता है.

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लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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