ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में ही यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 301वीं रैंक

UPSC: भोजपुर की आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने दूसरे प्रयास में यह सफलता पाई.

UPSC: आरा की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है. शुक्रवार को जारी हुए नतीजों में आकांक्षा ने ऑल इंडिया 301वीं रैंक हासिल की है. उनकी इस उपलब्धि पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा बिहार गर्व कर रहा है.

परिवार के बारे में जानिए

आकांक्षा के दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया अपने समय के चर्चित चेहरा रहे थे. एक वर्ग उनका बहुत सम्मान करता है. अकांक्षा के पिता इंदुभूषण सिंह ने बताया कि दादा का हमेशा से सपना था कि परिवार का कोई सदस्य बड़ा अधिकारी बनकर समाज की सेवा करे. आकांक्षा ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया. जैसे ही आरा के कतिरा मोहल्ले में उनकी सफलता की खबर पहुंची वैसे ही बधाई देने वालों का तांता लग गया.

संघर्ष और तैयारी का सफर

आकांक्षा की शुरुआती शिक्षा और ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई आरा के ही डीके जैन कॉलेज से हुई. इसके बाद वे अपनी तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं. उन्होंने बताया कि वे रोजाना 8 से 10 घंटे तक नियमित पढ़ाई करती थीं. यह उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें उन्हें यह बड़ी कामयाबी मिली. उनका मानना है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो यह मायने नहीं रखता कि आप छोटे शहर से हैं या बड़े शहर से.

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30-32 मिनट तक चला इंटरव्यू

आकांक्षा का इंटरव्यू करीब 30-32 मिनट तक चला, जिसमें उनसे लोक गायकी और पद्म पुरस्कारों से जुड़े सवाल भी पूछे गए. उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्हें आईआरएस (IRS) कैडर मिला है, लेकिन उनका दिल भारतीय विदेश सेवा (IFS) के लिए धड़कता है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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