bhagalpur news. बुजुर्ग छठ व्रत से करते हैं नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य की कामना

ज्यों-ज्यों बड़े-बुजुर्ग की उम्र बढ़ती जा रही है, त्यों-त्यों उनकी आस्था छठ महापर्व को लेकर बढ़ती जा रही है

ज्यों-ज्यों बड़े-बुजुर्ग की उम्र बढ़ती जा रही है, त्यों-त्यों उनकी आस्था छठ महापर्व को लेकर बढ़ती जा रही है. अस्वस्थ होने के बाद भी विधि-विधान में शामिल होना नहीं छोड़ रही है. छठ व्रत के जरिये नौनिहालों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं. सिल्क सिटी में 101 साल की बुजुर्ग महिला शकुंतला देवी छठ के विधि-विधान में शामिल हो रही हैं, तो 77 साल की दीपिका भगत अर्घ देकर सामाजिक व धार्मिक कार्य को बढ़ावा दे रही हैं. छठ पर्व के दौरान बुजुर्ग महिलाएं युवा महिलाओं को ””””””””खोइच”””””””” नामक एक विशेष अनुष्ठान में आशीर्वाद देती हैं. इसमें वे ठेकुआ और अंकुरित अनाज से भरे मिट्टी के बर्तन भेंट करती हैं. यह आशीर्वाद संतान प्राप्ति, उनके अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के लिए होता है. बुजुर्ग आशीर्वाद के साथ ही पीढ़ियों के बीच पारंपरिक ज्ञान और भक्ति की निरंतरता को भी सुनिश्चित करते हैं. परिवार व समाज में हैं सुख-समृद्धि सास पहले छठ करती थीं. 40 साल पहले उनकी परंपरा का निर्वहन करने के लिए व्रत शुरू किया. गौराचौकी स्थित तालाब में अर्घ देते थे. फिर उर्दूबाजार से किला घाट सराय में और अब 10 साल से सफाई व्यवस्था खराब होने के कारण घाट की बजाय घर के छत पर तालाब बनाकर सपरिवार छठ कर रही हूं. पुत्र सामाजिक क्षेत्र में काफी प्रतिष्ठा पा चुका है. भगवान सूर्य व माता छठ की कृपा है. 77 साल की उम्र में भी छठ को लेकर थकावट नहीं होती. दीपिका भगत, उर्दू बाजार माता की कृपा से पाैत्र बना बैंक पीओ भगवान सूर्य साक्षात भगवान हैं, जो प्रतिदिन लोगों को दर्शन देते हैं और विटामिन डी के साथ अन्य प्रकार की शक्ति संचारित करते हैं. 1987 से छठ पर्व में भगवान सूर्य की उपासना करती हूं. व्रत के कारण ही पौत्र बैंक पीओ बना और पुत्र वंशीलाल कन्हैया सामाजिक क्षेत्र में काफी प्रातिष्ठा प्राप्त कर रहे हैं. भगवान सूर्य को अर्घ देती हूं और खरना के दिन से ही उपवास करती हूं. 79 साल की उम्र में उत्साह में कमी नहीं है. स्नेहलता देवी, स्वामी विवेकानंद पथ आदमपुर 101 साल की शकुंतला देवी विधि-विधान में होती हैं शामिल 101 साल की उम्र में शारीरिक रूप से अस्वस्थ हूं. पहले तन-मन व धन से छठ व्रत करती थी. फिर भी छठ पर्व में विधि-विधान से शामिल होती हूं. पुत्र पंडित समीर मिश्रा व उनकी पत्नी के साथ मिलकर पूरी तरह से सात्विक रहती हूं. शरीर अब अधिक काम नहीं करता, लेकिन छठ मां की कृपा है कि उनके विधि-विधान में शामिल हो रही हूं. बोलना भी मुश्किल है. शकुंतला देवी, सखीचंद घाट छठ में शिष्यों को पढ़ाई में आगे बढ़ने का करती हूं कामना पिछले 23 साल से छठ महापर्व में सीधे रूप से हिस्सा ले रही हूं. शिक्षिका होने के नाते शिष्यों को पढ़ाई में आगे बढ़ने की कामना करती हूं. बिना शिक्षा के कोई काम संभव नहीं है. भगवान सूर्य व माता छठ की प्रेरणा से उनके शिष्य बेहतर कर रहे हैं. परिवार के सभी सदस्यों में भी मेलजोल है. चंदा देवी, ज्योति विहार कॉलोनी जाति व वर्ग विभेद से मुक्त है छठ महापर्व छठ महापर्व में कोई जाति व वर्ग का विभेद नहीं होता है. इसमें सब एक साथ मिलकर छठ करते हैं. इसमें ऊंच-नीच की खाई नहीं दिखती है. एक साथ मिलकर स्वच्छता अभियान चलाते हैं. पुत्र श्यामल किशोर मिश्रा व अन्य पुत्र में मेलजोल है. 1960 से लगातार छठ कर रही हूं. यह त्योहार अनुशासन सीखाता है. सावित्री देवी, पटेल नगर

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Author: ATUL KUMAR

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