दीवाली की तैयारी लोगों ने शुरू कर दी है. दीवाली में खासकर देवी लक्ष्मी की पूजा होती है. देवी लक्ष्मी के स्वागत में घर सजाने की तैयारी शुरू हो गयी है. बाजार में रंग, चूना, फेबिकॉल, वॉल पुट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस का चौगुना कारोबार बढ़ गया है. घर के रेनोवेशन को लेकर लोगों में पत्थर टाइल्स की बजाय सस्ता विकल्प के रूप में सिरोमिक टाइल्स, विनाइल फ्लोरिंग को अपना रहे हैं. सीमेंट की फर्श (फ्लोरिंग), विट्रिफाइड या सिरेमिक टाइल्स, स्टील या फाइबर की दीवारें जैसे मेटल या फैब्रिक पैनल, या लकड़ी या पीवीसी/विनाइल फ्लोरिंग जैसे विकल्प ढूंढ़ रहे हैं. लोगों के बीच ऐसा ट्रेंड शुरू हो गया है. 20 करोड़ से अधिक का रंग का कारोबार भागलपुर के लोहापट्टी में केवल 13 रंग की दुकानें हैं, जबकि पूरे शहर में 100 से अधिक रंग दुकानें हैं. भागलपुर बाजार से दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, बांका, जमालपुर, कोसी क्षेत्र खगड़िया, नवगछिया, बिहपुर आदि क्षेत्रों में रंग का कारोबार होता है. रंग कारोबारी अजय कुमार वर्मा ने बताया कि एक सीजन में 20 करोड़ से अधिक का रंग व अन्य सामान का कारोबार होता है. विनाइल और सिरेमिक टाइल्स का रखरखाव आसान दीपावली की तैयारियां हर घर में शुरू हो गयी है. इस साल पेंटिंग नहीं करवा रहे हैं, तो घर की दीवारों को सजाने और नया फ्रेश लुक देने के और भी कई तरीके हैं. कम समय और कम बजट में बेहतर ऑप्शन भी हो सकते हैं. रंग कारोबारियों की मानें तो विनाइल फ्लोरिंग जो टाइल्स से काफी सस्ती हो सकती है और इसे लगाना भी आसान होता है. यह पानी प्रतिरोधी भी होती है. सिरेमिक टाइल्स पत्थर की टाइलों की तुलना में अक्सर सस्ती होती हैं और बाथरूम जैसी जगहों पर लगाना आसान होता है. सीमेंट या कंक्रीट फ्लोरिंग: सीमेंट की फ्लोरिंग टाइल्स के मुकाबले बहुत कम खर्चीली होती है, हालांकि यह कम आकर्षक लग सकती है. आप इसे रंग या डिजाइन के साथ और भी आकर्षक बना सकते हैं. दीवारों के लिए प्लास्टर और पेंट का विकल्प टाइल्स या वॉल पैनल से बहुत सस्ता होगा. स्टील या फाइबर पैनल: कुछ प्रकार के फाइबर या विनाइल पैनल होते हैं जिन्हें टाइल्स के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जो लगाने में आसान होते हैं और साफ भी हो जाते हैं. विनाइल और सिरेमिक टाइल्स का रखरखाव आसान होता है. विभिन्न प्रकार के खर्चों, जैसे सामग्री, लेबर और लगाने के खर्च को मिलाकर ही कुल लागत का अनुमान लगाया जाता है. थ्री डी पैनल, वॉलपेपर व पीवीसी लोअर का भी प्रचलन कम नहीं रंग कारोबारी शंभु प्रसाद ने बताया कि अभी मार्केट में वॉलपेपर, थ्रीडी पैनल, पीवीसी लोअर, यूबी मार्बल शीट, वॉल स्टिकर फ्लूटेड के अलावा बहुत से हाईलाइटर डिजाइन हैं. 10 बाई 10 की दीवारों पर अगर यह काम करवाते हैं तो आप 50 स्क्वायर फीट से लेकर 500 स्क्वायर फीट तक में इस लग्जरी और रॉयल लुक के काम को करवा सकते हैं. यह बजट फ्रेंडली होते हैं, पीवीसी पैनल की 10 बाई 10 की दीवार पूरी करवाने में लगभग 7000 से 8000 रुपए का खर्च आता है. कांट्रेक्टर अमित सिंह ने बताया कि वॉलपेपर करवाने में 3000 से 4000 और मार्बल सीट लगवाने में लगभग 10000 से 12000 तक खर्च आ सकता है. इसके अलावा इस वक्त थोड़ा लग्जरी और महंगे में क्ले डिजाइन का बहुत चलन बढ़ रहा है. क्ले डिजाइन थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन बड़े-बड़े घरों और बड़े-बड़े ऑफिस में इसी का यूज किया जा रहा है. सबसे बेहतर और सस्ता ऑप्शन वॉलपेपर का है, जो 200 रुपए रोल से लेकर 5000 रुपए रोल तक उपलब्ध है. कम बजट में 200, 500, 1200 तक की रोल उपलब्ध है. 10 बाई 10 की अगर एक दीवार करवानी है, तो दो से ढाई रोल में यह काम होता है. प्रतिरोल 300 से 400 लगवाने का खर्च गिरता है, कुल मिलाकर लगभग एक 10 बाई 10 की दीवार 4000 से 4500 रुपये में तैयार हो जाता है. लोगों को भा रहा है फैंसी व डिजाइनर फूल-पत्ती इधर घर के सजावट में रंग के अलावा फूल-पत्ती की भी जरूरत होती है. इसे लेकर भी बाजार में दुकानें सजायी गयी है, जहां पर फैंसी झालर, कागज लैंप, बंदनवार, रंगोली आदि बिक रहे हैं. अभी डिजाइनर झालर लोगों को अधिक लुभा रहे हैं. रंग-पेंट की कीमत पर उपभोक्ताओं को राहत रंग कारोबारी विकास झुनझुनवाला ने बताया कि इस बार उपभोक्ताओं को रंग-पेंट की कीमत पर राहत है. जीएसटी में कोई छूट नहीं है, लेकिन कीमत पिछले साल जैसी है. अभी सेमोसेम 20 किलोग्राम का 600 रुपये, वॉलपुट्टी 620 रुपये में 40 किलोग्राम का पैकेट, चूना 140 रुपये में 10 किलोग्राम का पैकैट, फेबीकॉल 120 रुपये एक किलोग्राम, प्लास्टिक पेंट 150 से 650 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है. एशियन एपेक्स 5500 रुपये प्रति 20 लीटर, डिस्टेंपर 900 रुपये प्रति 20 किलोग्राम, ब्रश 100 से 250 रुपये में चार इंच का मिल रहे हैं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
