भागलपुर. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में नियम-परिनियम और संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सेंट्रल लाइब्रेरी में संचालित लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार कर्मियों की संविदा पर नियुक्ति किये जाने की बात सामने आयी है. इनमें दो शिक्षक, एक कार्यालय सहायक और एक सफाईकर्मी शामिल हैं. रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे की ओर से 29 अगस्त को नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की गयी. अधिसूचना में लोकभवन और सिंडिकेट की अनुमति का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.
29 अगस्त को जारी हुई नियुक्ति की अधिसूचना
बताया जा रहा है कि लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग की ओर से संविदा पर कर्मियों की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार किया गया था. इसे 26 अगस्त को विश्वविद्यालय की एडवाइजरी कमेटी के समक्ष रखा गया. इसके बाद एडवाइजरी कमेटी के निर्णय के आधार पर प्रभारी कुलपति की स्वीकृति मिलने की बात कही जा रही है. इसके बाद चार संविदा कर्मियों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना 29 अगस्त को जारी की गयी. जानकारी के अनुसार चारों कर्मियों ने एक सितंबर से विभाग में काम करना शुरू कर दिया है.
लोकभवन की अनुमति को लेकर उठ रहा सवाल
विश्वविद्यालय में संविदा पर नियुक्ति को लेकर लोकभवन से अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये जाने को लेकर सवाल उठ रहा है. आरोप है कि लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार कर्मियों की बहाली से पहले आवश्यक अनुमति और प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी.
अधिसूचना में लोकभवन और सिंडिकेट की अनुमति का उल्लेख नहीं होने को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये जा रहे हैं. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में स्पष्ट आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है.
107 संविदा कर्मियों के सेवा विस्तार के लिए मांगा जा रहा दिशा-निर्देश
विश्वविद्यालय के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार विवि में पहले से कार्यरत 107 संविदा कर्मियों की सेवा अवधि 10 अगस्त को समाप्त हो चुकी है. इनके सेवा विस्तार के लिए लोकभवन से दिशा-निर्देश मांगे जाने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूर्व से कार्यरत संविदा कर्मियों के सेवा विस्तार के लिए लोकभवन से दिशा-निर्देश मांगा जा रहा है, तो लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार नये संविदा कर्मियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत की गयी.
स्थापना शाखा में ताला रहने के बावजूद अधिसूचना जारी होने पर सवाल
विश्वविद्यालय की स्थापना शाखा को लेकर भी इस मामले में सवाल उठाये जा रहे हैं. बताया गया है कि बिना अनुमति फाइलों के इधर-उधर किये जाने की शिकायत के बाद प्रभारी कुलपति के आदेश पर उनके पीए ने स्थापना शाखा के कार्यालय में ताला लगा दिया था.
ऐसे में सवाल है कि स्थापना शाखा का कार्यालय बंद रहने के बावजूद चार संविदा कर्मियों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और अधिसूचना कैसे जारी कर दी गयी.
रजिस्ट्रार से नहीं मिल सका पक्ष
मामले में रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे छुट्टी पर थे. प्रभारी रजिस्ट्रार प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रभारी रजिस्ट्रार होने के कारण उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है.
सिंडिकेट सदस्य ने कहा, बहाली हुई है तो सरासर गलत
सिंडिकेट सदस्य सह एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार संविदा कर्मियों की बहाली के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि संविदा पर इस तरह बहाली की गयी है तो यह सरासर गलत है. उन्होंने कहा कि मामले को सिंडिकेट की बैठक में रखा जायेगा.
सिंडिकेट सदस्य बोले, मामले को बैठक में नहीं रखा गया
सिंडिकेट सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने भी कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. उनके अनुसार विश्वविद्यालय ने इस मामले को सिंडिकेट में नहीं रखा था. उन्होंने कहा कि संविदा पर बहाली के लिए सिंडिकेट की अनुमति जरूरी होती है.
नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बढ़ा विवाद
लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में चार संविदा कर्मियों की नियुक्ति के बाद अब विश्वविद्यालय में संविदा बहाली की प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ गया है. एक ओर एडवाइजरी कमेटी के निर्णय और प्रभारी कुलपति की स्वीकृति के आधार पर नियुक्ति किये जाने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर सिंडिकेट सदस्यों ने प्रक्रिया और अनुमति को लेकर सवाल उठाये हैं. अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस नियुक्ति की प्रक्रिया और संबंधित अनुमतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट किये जाने का इंतजार है.
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