प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के निर्देश पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रो. रामाशीष पूर्वे ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जो संबंधित कॉलेजों में नियमित नियुक्ति होने अथवा विश्वविद्यालय के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. राजभवन और बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के कड़े निर्देशों के आलोक में यह फैसला लिया गया है ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नए कॉलेजों में पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके.
इन छह प्रोफेसरों को भेजा गया नए कॉलेजों में, देखें पूरी सूची
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, पीजी विभागों और प्रतिष्ठित अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों को ग्रामीण व सुदूर इलाकों में बने नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में भेजा गया है:
| क्र.सं. | शिक्षक का नाम | मूल विभाग/कॉलेज | प्रतिनियुक्ति का नया स्थान |
| 1. | डॉ. आनंद कुमार झा (रीडर) | पीजी इतिहास विभाग, टीएमबीयू | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, खरीक |
| 2. | डॉ. अंशुमान सुमन (सहायक प्राध्यापक) | टीएनबी कॉलेज, भागलपुर | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, पीरपैंती |
| 3. | डॉ. संजीव कुमार | टीएनबी कॉलेज, भागलपुर | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, पीरपैंती |
| 4. | डॉ. हिमांशु शेखर (सहायक प्राध्यापक) | एसएम कॉलेज, भागलपुर | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, फुल्लीडुमर |
| 5. | उमा शंकर पासवान (सहायक प्राध्यापक) | एसएसवी कॉलेज, कहलगांव | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, बराहाट |
| 6. | डॉ. जॉयदीप मुखर्जी | गोराडीह कॉलेज (पूर्व प्रतिनियुक्ति) | राजकीय डिग्री महाविद्यालय, रंगरा चौक |
तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त, वेतन को लेकर नीति स्पष्ट
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिसूचना में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आदेश जारी होने के साथ ही सभी छह प्रतिनियुक्त शिक्षक अपने मूल पदस्थापन स्थान से स्वतः कार्यमुक्त (Relieved) माने जाएंगे. उन्हें अविलंब नए आवंटित महाविद्यालयों में योगदान देना होगा.
वेतन भुगतान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए रजिस्ट्रार ने कहा कि इन शिक्षकों के वेतन एवं अन्य स्वीकृत भत्तों का भुगतान उनके मूल संस्थान (जहां वे पहले कार्यरत थे) द्वारा ही किया जाएगा. इसके लिए नए कॉलेज के प्राचार्य द्वारा भेजे जाने वाले 'अनुपस्थिति प्रतिवेदन' (Attendance Report) को आधार बनाया जाएगा.
शिक्षकों में खौफ, दबी जुबान में हो रहा विरोध
विश्वविद्यालय के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, इस अचानक हुए तबादले और प्रतिनियुक्ति से शिक्षकों में भारी आक्रोश है, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा है.
सत्र 2026-27 से इन नवस्थापित कॉलेजों में बिना किसी बाधा के शिक्षण कार्य संचालित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. यह निर्णय पूरी तरह से छात्रहित और राज्य सरकार की नीतियों के तहत लिया गया है. आदेश की प्रति संबंधित शिक्षकों, प्राचार्यों, विभागाध्यक्षों और उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए तामील करा दी गई है.
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस सख्त रवैये के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रतिनियुक्त शिक्षक तय समय सीमा के भीतर अपने नए कार्यस्थलों पर योगदान देते हैं या शिक्षक संघ इस मुद्दे पर कोई नया रुख अख्तियार करता है.
