bhagalpur news. इस बार सबसे बड़ा रोजा 13:25 घंटे का

माहे रमजान 19 से हो सकता है शुरू.

पवित्र माह- 19 फरवरी से शुरू हो सकता है माहे रमजान, पहला रोजा 12 घंटे 39 मिनट का

आरफीन, भागलपुरइस बार माहे रमजान में रोजेदारों को 14 घंटे के बजाय 13 घंटे से ज्यादा का रोजा रखना होगा. माहे रमजान 19 फरवरी से शुरू हो सकता है, जो मार्च के तीसरे सप्ताह तक चलेगा. इस बार सबसे बड़ा रोजा 13 घंटे 25 मिनट का होगा. रमजान के पूरे माह में 46 मिनट बढ़ेंगे. पहला रोजा 12: 39 मिनट का होगा. फिर मिनट-मिनट बढ़ता जायेगा. 11वां रोजा 12: 55 मिनट का होगा. 20वां रोजा 13:09 मिनट, 25वां रोजा 13:18 व 30वां रोजा 13: 25 घंटे का होगा.

घर व मस्जिदों की सफाई जोरों पर

माहे रमजान को लेकर लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है. घर व मस्जिदों की सफाई जोरों से की जा रही है. मस्जिदों के अलावा कई निजी जगहों पर भी तरावही की नमाज पढ़ाई जाती है. ऐसे में उन निजी स्थानों की भी सफाई की जा रही है. दरअसल, रमजान के दौरान इबादत एक अहम हिस्सा है. मुसलमान भाई मस्जिदों में तरावीह की नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा होते हैं. कुरान की तिलावत सुनते हैं. तरावीह नमाज रमजान का चांद दिखने के बाद से शुरू होती है. जबकि ईद का चांद दिखने तक इसे पढ़ी जाती है.

सर्दी के मौसम में रोजा का घंटा कम हो जाता – मुफ्ती

मदरसा शहबाजिया के मुफ्ती फारूक आलम अशरफी ने बताया कि 33 साल के बीच में ऐसा मौसम आता है. सर्दी के मौसम में रोजा का घंटा कम हो जाता है. जबकि गर्मी के मौसम में करीब 15-16 घंटे तक का रोजा होता है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 से 2003 के बीच जनवरी-दिसंबर में रमजान का रोजा रखा गया था. सर्दी के मौसम में 12 घंटे से भी कम समय का रोजा होता था. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार माहे रमजान का चांद 30 तारीख का होता है, तो पहला रोजा 19 फरवरी से शुरू हो सकता है. उन्होंने कहा कि रोजा इम्तिहान की तरह है. अल्लाह अपने बंदों से रोजा से इम्तिहान लेते है. बच्चा, बड़ा व बुजुर्ग हर कोई शिद्दत से रोजा रखते है. उन्होंने कहा कि एक हदीस में अनुसार हजरत-ए-अली ने फरमाया है कि मुझे गर्मी का रोजा सबसे ज्यादा पसंद है.

माहे रमजान में इस बार पड़ेगा पांच जुमा –

इस बार माहे रमजान में पांच जुमा आयेगा. रमजान के पाक माह में एक के बदले 70 गुना सवाब मिलता है. बरहपुरा जामा मस्जिद के इमाम हाफिज कुदरतउल्लाह ने कहा कि जुमा के बारे में हदीस में आया है कि तमाम दिनों का सरदार जुमा है. रमजान का माह तमाम महीनों का सरदार है. जब रमजान में जुमा आता है, तो उस दिन मिलने वाले सवाब का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. रमजान का जुमा अन्य महीनों के जुमा से 70 गुना से भी ज्यादा फजीलतवाला है. इस बार रोजेदारों को पांच जुमा मिलेगा.

कम खाये व पानी पीये ज्यादा

रोजा करने पर लोगों को गैस की शिकायत ज्यादा होने लगती है. इससे बचने की जरूरत है. चिकित्सक डॉ रफी जुबैर ने कहा कि पानी की कमी से बचने के लिए रोजेदारों को रोजा तोड़ने के बाद कम खाना चाहिए. पानी का सेवन अधिक करना चाहिए. केला, शरबत, दूध, लस्सी व नारियल पानी का सेवन करें. नमक का सेवन अधिक करने से बचे.

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