-दल्लू बाबू धर्मशाला समीप स्थित भगवान सत्यनारायण मंदिर से 1988 में चोरी हुए चार प्रतिमाएं वर्षों से कोर्ट के मालखाना में जमा हैदीपक राव, भागलपुर
लहरी टोला दुर्गा स्थान के सामने दल्लू बाबू धर्मशाला समीप 1904 में भगवान सत्यनारायण मंदिर की स्थापना की गयी थी और चार देवी-देवताओं की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की गयी थी. 1988 में चारों मूर्ति चोरी हो गयी. इसकी रिपोर्ट थाना में दर्ज करा दी गयी. छह माह बाद पुलिस ने सभी चारों मूर्ति को छत्रपति तालाब, शीतला स्थान मीरजानहाट समीप से बरामद कर लिया. तभी से मूर्ति एग्जिबिट के लिए कोर्ट के मालखाना में जमा है. ट्रस्टी की ओर से 38 साल में 20 बार से अधिक बार हरेक तरह से मूर्ति को मुक्त कराने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण सफलता नहीं मिल पायी.तत्कालीन ट्रस्टी मोहरीलाल सिंहानिया ने 26 अप्रैल 1988 को दर्ज करायी थी चोरी की रिपोर्ट
तत्कालीन ट्रस्टी मोहरीलाल सिंहानिया ने 26 अप्रैल 1988 को चोरी की रिपोर्ट दर्ज करायी थी. छह माह बाद 28 सितंबर 1988 को पुलिस ने छत्रपति तालाब से भगवान सत्यनारायण, लक्ष्मीजी, राधाजी व श्रीकृष्ण की प्रतिमा को बरामद किया था. ट्रस्टी की ओर से कई आवेदन के बाद भी कोर्ट मालखाना में जमा मूर्ति को मुक्त कराने में सफलता नहीं मिली.पिछले साल तुड़वाया गया था मालखाना का ताला, फिर अंधेरा बनी बाधा
वर्तमान ट्रष्टी अशोक जिवराजका ने बताया कि कोर्ट मालखाना के ताला की दो चाबी, जिसमें एक एसएसपी कार्यालय व दूसरा नजारत के पास रहता है. चाबी नहीं मिलने पर जिलाधिकारी, एसएसपी व जिला जज की मौजूदगी में मालखाना का ताला तोड़ा गया. कोर्ट मालखाना में इतना अंधेरा था कि इंजेप्टरी जब्ती नहीं बन सकी. इससे मूर्ति रिलीज नहीं हो सकी. फिर निर्णय लिया गया कि एक नया कमरा बनेगा. तभी जब्ती सूची बनायी जायेगी.
