-बीएयू में लीची पर बग पाया गया, जिले के अधिकांश इलाके अभी तक सुरक्षित
राज्य के अलग-अलग हिस्से में लीची की फसल पर आक्रामक किट “लीची स्टिंग बग ” देखा जा रहा है. बीएयू सबौर ने इसे लीची पर खतरे के रूप में देख रहा है. यह कीट कोमल शाखाओं,पुष्प गुच्छ एवं विकसित हो रहे फलों से रस चूस कर क्षति पहुंचाता है. लीची उत्पादन प्रणाली पर संभावित खतरे को देखते हुए आइसीएआर, नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची बीएयू तथा डॉ राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पूसा के वैज्ञानिकों की एक बहु संस्थागत तकनीकी टास्क फोर्स गठित की गयी है. जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक सर्विलांस, जिओ रेफरेस्ड मॉनिटरिंग तथा समेकित कीट प्रबंधन रणनीतियों का विकास करना है.बीएयू सबौर से डॉ तारकनाथ गोस्वामी को इस विशेषज्ञ टास्क फोर्स का सदस्य नामित किया गया है. डॉ एके सिंह एवं डॉ किरण कुमारी के मार्गदर्शन मे डॉ गोस्वामी तथा उनके छात्र दीपक कुमार द्वारा भागलपुर जिले के प्रमुख लीची उत्पादक क्षेत्रों जिनमें बीएयू सबौर परिसर,कहलगांव, पन्नूचक,ममलखा,तीनटंगा, गंगानगर,बुद्धूचक में सर्वेक्षण एवं कीट निगरानी कार्य किया गया. सर्वेक्षण के दौरान बीएयू सबौर स्थित उद्यानिकी उद्यान में लीची स्टिंग बग के कुछ निम्फ पाये गये जबकि अन्य सभी सर्वेक्षित बागान इस किट से मुक्त पाये गये.
वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्तमान में किट का प्रकोप सीमित एवं स्थानीय स्तर पर है परंतु इसके संभावित प्रसार को रोकने हेतु सतत निगरानी एवं प्रारंभिक नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है. बीएयू के कुलपति डॉ डी आर सिंह ने आश्वस्त किया कि बीएयू सबौर क्षेत्र विशेष कीट प्रबंधन प्रोटोकॉल एवं वैज्ञानिक परामर्श सेवाओं के माध्यम से लीची उत्पादकों के हितों की रक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है.