– दिल्ली, धनबाद, कोलकाता, पटना आदि के सत्संगियों का कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में हुआ जुटान, पाक्षिक ध्यानाभ्यास शिविर का हुआ समापन
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट
महर्षि संतसेवी महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर गुरुवार को कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में स्तुति विनती, पुष्पांजलि, भंडारा व सत्संग का आयोजन हुआ. परिनिर्वाण दिवस समारोह का शुभारंभ सत्संगियों व साधकों की सेवा कार्य से हुआ.इससे पहले अखिल भारतीय संतमत सतसंग महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश, मंत्री राम कुमार, सदस्य धनबाद के संजीव घोष, कोलकाता के राम प्रसाद, पटना के वंशी प्रसाद, सदस्य विश्वनाथ सिंह, सुभाष यादव, देवी यादव ने श्रद्धालुओं के बीच आम व लीची बांटा, तो पाक्षिक ध्यानाभ्यास शिविर के समापन पर साधकों को सतरंगी भागलपुरी डल चादर प्रदान कर सम्मानित किया गया.
सद्गुरु महर्षि मेंहीं की सेवा में संपूर्ण जीवन को अर्पित कर बने महर्षि संतसेवी : दिव्य प्रकाशप्रात:कालीन सत्संग के बाद आठ बजे आचार्य श्री समेत आश्रम के सभी संतों व श्रद्धालुओं ने सद्गुरु महर्षि मेंहीं व महर्षि संतसेवी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की. 11 बजे भंडारा हुआ. भंडारा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद पाया. तीन बजे स्तुति गान के साथ ही सत्संग का शुभारंभ हुआ. सत्संग आयोजन में गुरुसेवी भगीरथ दास महाराज, गुरुचरणसेवी प्रमोद बाबा, नंदन बाबा, रवींद्र बाबा, गंभीरानंद बाबा आदि ने प्रवचन किया. इस दाैरान महर्षि संतसेवी महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला. मंच का संचालन स्वामी डाॅ सत्यप्रकाश बाबा ने किया.
वर्तमान आचार्यश्री से भी सत्संगियों व श्रद्धालुओं ने उनके आवास में जाकर आशीर्वाद लिया. गुरुसेवी भगीरथदास महाराज, गुरुचरणसेवी प्रमोद दासजी महाराज, स्वामी डॉ सत्यप्रकाशजी महाराज, नंदन बाबा, रमेश बाबा, कृष्णवल्लभ बाबा, रविन्द्र बाबा, अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के पदाधिकारी ने पुष्पांजलि अर्पित की. महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश ने ने कहा कि महर्षि संतसेवी ने तीन मार्च 1939 से नौ जून 1986 तक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के साथ छाया की तरह अपनी सेवा में संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया और संतसेवी के नाम को सार्थक कर दिखाया. आयोजन में अमित कुमार, श्याम सुंदर कुमार, सूरज कुमार, अरविंद कुमार, प्रकाश ने अपनी सेवा दी.