22 जुलाई तक दक्षिण बिहार में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों को धान की बुवाई और बीज उपचार की सलाह

Bihar Weather:बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने 18 से 22 जुलाई तक दक्षिण बिहार में मध्यम से भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है. किसानों को धान की उन्नत किस्मों की बुवाई और बीज उपचार के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी गई है.

Bhagalpur Weather: दक्षिण बिहार के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने वाला है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के आधार पर मौसम बुलेटिन जारी करते हुए 22 जुलाई तक गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है. वहीं जमुई, नवादा और गया जिले के कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा होने का भी अनुमान है.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की बुवाई, नर्सरी प्रबंधन और बीज उपचार को लेकर जरूरी सलाह जारी की है, ताकि बारिश का अधिकतम लाभ उठाया जा सके.

22 जुलाई तक इन जिलों में भारी बारिश के आसार

बीएयू, सबौर के मौसम बुलेटिन के अनुसार 18 से 22 जुलाई के दौरान दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है.

विशेष रूप से जमुई, नवादा और गया जिले के एक या दो स्थानों पर अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है.

तापमान और हवा का रहेगा ऐसा हाल

पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.

सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत और दोपहर में 65 से 75 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

अगले दो दिनों तक दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी. इसके बाद हवा की दिशा दक्षिण-पूर्व होने की संभावना है.

किसानों को धान की इन किस्मों की बुवाई की सलाह

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने किसानों को मौसम का लाभ उठाते हुए धान की सबौर सुरभित, भागलपुर कतरनी और सबौर दीप किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी है.

वैज्ञानिकों के अनुसार बुवाई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करना चाहिए. इससे बीज जनित रोगों का खतरा कम होगा और बेहतर अंकुरण मिलेगा.

नर्सरी और खरपतवार प्रबंधन पर भी जोर

कृषि विशेषज्ञों ने 10 से 15 दिन पुरानी धान की नर्सरी में समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी है.

इसके अलावा पुरानी नर्सरी में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, ताकि पौधों की बढ़वार प्रभावित न हो.

सीधी बुवाई के लिए भी उपयुक्त समय

वैज्ञानिकों के मुताबिक किसान सबौर मोती धान और सबौर सोना जैसी किस्मों की सीधी बुवाई भी कर सकते हैं.

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए यह समय धान की खेती के लिए अनुकूल माना जा रहा है. मौसम के अनुसार खेती करने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

यह मौसम आधारित कृषि परामर्श बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार की ओर से जारी किया गया है.

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लेखक के बारे में

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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