– मशीन खरीदने का मकसद था सड़कों पर जमी धूल की सफाई और वायु प्रदूषण को भी कंट्रोल करना- मशीन न तो सड़कों पर निकली और न की सफाई, स्वच्छता सर्वेक्षण में आया 403वां स्थान, तो जताया अफसोस
वरीय संवाददाता, भागलपुरसड़कों की धूल हटाने के लिए नगर निगम की ओर से कोई पहल नहीं हो रही है और न ही स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से खरीदी गयी रोड स्वीपिंग मशीन इस काम में आ रही है. मशीन खरीदने का मकसद था कि सड़कों पर जमी धूल साफ हो, साथ ही वायु प्रदूषण को भी कंट्रोल किया जाये, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आज की तारीख में वह मशीन किस स्थिति में है और कौन से गोदाम में धूल फांक रही है वह तो स्मार्ट सिटी कंपनी ही बता सकती है. लेकिन, सच्चाई यह है कि दो मशीनें स्मार्ट सिटी कंपनी ने खरीदी थी. जांच रिपोर्ट की मानें, तो चेक संख्या 928885 द्वारा रोड स्वीपिंग मशीन और मिनी जेटिंग मशीन के लिए 39 लाख 94 हजार अग्रिम टीपीएस को दिया गया था. क्रय समिति द्वारा स्वीपिंग मशीन की दर 31 लाख 60 हजार रुपये प्रति मशीन निर्धारित किया गया था. मिनी जेटिंग मशीन की दर 15 लाख 50 हजार रुपये प्रति मशीन निर्धारित की गयी थी. तीन मिनी जेटिंग मशीनें और दो रोड स्वीपिंग मशीन का कार्यादेश के आलोक में एजेंसी ने आपूर्ति भी कर दी थी और यह भंडार पंजी के पृष्ठ संख्या 50 पर भी अंकित है. बावजूद, मशीन को उपयोग में नहीं लायी जा रही है. इस संबंध में सीजीएम संदीप कुमार और पीआरओ पंकज कुमार से बात करने की कोशिश की गयी, तो उनकी ओर से फोन रिसीव नहीं किया गया.ट्रैफिक ट्रॉली व बैरियर खरीद की बनी थी योजना, 900 में 329 की हुई आपूर्ति, एडवांस दिया था 20 लाख
स्मार्ट सिटी कंपनी ने साल 2019 से पहले ब्लैक बेरी ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, नयी दिल्ली को 25 लाख अग्रिम दिया था. एजेंसी ने 900 में 329 ट्रॉली की आपूर्ति की थी. शेष ट्रॉली की आपूर्ति एजेंसी द्वारा जांच की कार्रवाई होने तक नहीं की गयी थी. इसके लिए एजेंसी को निर्देश नहीं दिया गया था. आपूर्ति सामग्री का इंस्टॉलेशन व सत्यापन रिपोर्ट अप्राप्त था. सवाल अब यह है कि ऑर्डर जितनी आपूर्ति हुई है या नहीं. एडवांस 25 लाख रुपये था, तो खरीद की पूरी राशि कितनी रही होगी. यह स्मार्ट सिटी कंपनी बता नहीं पा रही है.बॉक्स मैटर
टूटी सड़कों पर कामयाब नहीं
स्वीपिंग मशीन न तो टूटी सड़कों पर कामयाब है और न ही यह पाइपलाइन बिछाने के लिए काटी गयी सड़क के हिस्से की सफाई कर सकेगी. यह चिकनी सड़क और डिवाइडर के साथ ही सफाई कर सकती है. जबकि, सच्चाई यह है कि डिवाइडर ही नहीं है और न ही धूल उड़ने वाले इलाके में अच्छी सड़क. धूल सभी जगहों पर उड़ रही है. स्वीपिंग मशीन के अगले पहियों के पीछे ब्रश लगे रहते हैं जो घूमते हुए सड़क पर जमी धूल को उड़ाते हैं. इनके पीछे लगे वेक्यूम प्रेशर उड़ने वाली धूल को खींच कर टैंक तक पहुंचाते हैं. परंतु, वेक्यूम केवल उसकी धूल को ही खींच पाता है जो गाड़ी के नीचे होती है. टूटी सड़कों पर तो यह मशीन बिल्कुल भी काम नहीं करती.
बॉक्स मैटर
स्वच्छता सर्वेक्षण में 403वां स्थान आने की एक वजह यह भी
केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की रिपोर्ट जारी हुई थी, जिसमें भागलपुर शहर को 403वां स्थान मिला था. इसकी एक वजह यह भी रही थी कि मशीन रहते सफाई नहीं करायी जा सकी. इससे पहले 365 वीं रैंक भागलपुर को मिली थी. मेयर बसुंधरा लाल ने बतायी थी कि सफाई व्यवस्था एजेंसी के हाथ में देने के बाद पूरी तरीके से चरमरा गई. हमलोग इसको हटाने का प्रयास कर रहे हैं. कई बार हमने चिट्ठी भी लिखी है. लेकिन, इस पर अब पर्दा डाल दिया गया है. निगम के कर्मचारी जब काम करते थे तो सफाई व्यवस्था काफी हद तक सुधरी हुई थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
