सुलतानगंज(भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट
Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. सावन महीने की शुरुआत में अब केवल चार दिन शेष हैं और बाबा अजगैबीनाथ की नगरी सुलतानगंज पूरी तरह शिवमय और केसरियामय नजर आने लगी है. नमामि गंगे घाट से लेकर कांवरिया पथ तक तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इस बार लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए प्रशासन ने सिर्फ सुरक्षा और सुविधाओं पर ही नहीं, बल्कि भाषा और तकनीक पर भी विशेष जोर दिया है. पहली बार श्रद्धालुओं को छह भाषाओं में जरूरी जानकारी मिलेगी. 105 लाउडस्पीकरों से चौबीसों घंटे घोषणाएं होंगी और एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से पूरे मेले की निगरानी की जाएगी. प्रशासन का दावा है कि इस बार का श्रावणी मेला पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीक से लैस होगा.
श्रावणी मेला 2026 के लिए तैयार हुई बाबा अजगैबीनाथ की नगरी
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही सुलतानगंज का पूरा वातावरण भक्तिमय हो चुका है. शहर की सड़कें, घाट, कांवरिया पथ और प्रमुख चौक आकर्षक रोशनी, तोरण द्वार और भगवान शिव की थीम वाली सजावट से सजे हुए हैं.
जिला प्रशासन, नगर परिषद और विभिन्न विभाग युद्धस्तर पर अंतिम तैयारियों में जुटे हैं. लक्ष्य सिर्फ इतना नहीं है कि मेला सफल हो, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिले.
Shravani Mela 2026: पहली बार 6 भाषाओं में मिलेगी हर जरूरी जानकारी
इस बार श्रावणी मेला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. नगर परिषद ने निर्णय लिया है कि श्रद्धालुओं के लिए सभी महत्वपूर्ण घोषणाएं छह भाषाओं में की जाएंगी.
हिंदी के अलावा नेपाली, बंगाली, भोजपुरी, अंगिका और मैथिली भाषा में लगातार सूचनाएं प्रसारित होंगी. इसका उद्देश्य बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, नेपाल और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा संबंधी किसी भी कठिनाई से बचाना है.
105 लाउडस्पीकर और केंद्रीय कंट्रोल रूम से होगी पूरी निगरानी
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक आनंद के अनुसार पूरे मेला क्षेत्र में 105 ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाए जा चुके हैं. इनसे चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाई जाएंगी.
आदर्श मध्य विद्यालय परिसर में केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहीं से विश्राम स्थल, पेयजल केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं, खोया-पाया केंद्र, ट्रेनों की जानकारी, मूल्य सूची, प्रशासनिक निर्देश और आपातकालीन दूरभाष नंबर जैसी जानकारियां लगातार प्रसारित की जाएंगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना और किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं तक तुरंत सूचना पहुंचाना है.
हरिशयनी एकादशी पर उमड़ी शिवभक्तों की भीड़
श्रावणी मेला के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही श्रद्धालुओं का उत्साह साफ दिखाई देने लगा है.
बंगला सावन के आठवें दिन हरिशयनी एकादशी के अवसर पर शनिवार को उत्तरवाहिनी गंगा तट पर हजारों कांवरियों की भीड़ उमड़ पड़ी. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा शुरू की.
सुबह और शाम के समय पूरा कांवरिया पथ "बोल बम" के जयघोष से गूंजता रहा. हालांकि दोपहर की तेज धूप के दौरान कुछ समय के लिए यात्रियों की आवाजाही कम हो गई, लेकिन शाम होते ही फिर से कांवरियों की भीड़ बढ़ गई.
विशाल डमरू द्वार बनेगा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
कच्चे कांवरिया पथ पर राधा स्वामी सत्संग ब्यास के समीप इस बार विशाल डमरू थीम वाला भव्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है.
कोलकाता से आए कारीगर दिन-रात इसके निर्माण में जुटे हैं. इस द्वार की सबसे खास बात यह होगी कि यहां से गुजरते समय शिव धुन सुनाई देगी. साथ ही ऐसी व्यवस्था भी की जा रही है जिससे श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत मिल सके.
बताया गया है कि अगले दो दिनों में यह आकर्षक प्रवेश द्वार पूरी तरह तैयार हो जाएगा.
सुलतानगंज पूरी तरह शिवमय और केसरियामय नजर आने लगा
श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही पूरा सुलतानगंज केसरिया रंग में रंग चुका है.
नमामि गंगे घाट से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों तक आकर्षक लाइटिंग, तोरण द्वार और धार्मिक सजावट की गई है. कृष्णानंद स्टेडियम में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को देखते हुए दो हेलिपैड तैयार किए गए हैं. स्टेडियम की दीवारों पर भगवान शिव और श्रावणी मेला की थीम पर भव्य थ्री-डी पेंटिंग बनाई गई है.
शहर का सौंदर्यीकरण इस तरह किया गया है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण के साथ एक यादगार अनुभव भी मिल सके.
Shravani Mela 2026: प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती अब भीड़ प्रबंधन होगी
श्रावणी मेला का औपचारिक उद्घाटन अभी होना बाकी है, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार प्रभावी बनाए रखना होगी.
नमामि गंगे घाट, कांवरिया पथ, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है. यदि सभी व्यवस्थाएं तय योजना के अनुसार संचालित होती हैं तो इस बार लाखों श्रद्धालुओं को पहले से अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित श्रावणी मेला का अनुभव मिलेगा.
Also Read: पटना: दंगा फैलाने के आरोप में पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा मामला
Also Read: अभिजीत दीपके से तेजप्रताप यादव बोले- बिहार आइए, सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाइए
