ग्रामीण इलाकों में बच्चों के नियमित टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था की उदासीनता एक बार फिर सामने आयी है. जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रखंड स्तर पर टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रहा है. इसका नतीजा यह है कि कई बच्चे आवश्यक टीकों से वंचित रह जा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है. लापरवाही पर कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. सिविल सर्जन के आदेश पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहकुंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने 17 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों से जुड़े नर्सों व अन्य टीकाकरण कर्मियों से जवाब-तलब किया है.
स्वास्थ्य विभाग की आंतरिक समीक्षा में दिसंबर 2025 के दौरान टीकाकरण की प्रगति अपेक्षा से काफी कम पायी गयी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वरीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. जारी आदेश में संबंधित कर्मियों को तत्काल स्थिति सुधारने और क्षेत्र में पूर्ण टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करने को कहा गया है. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक शत प्रतिशत नियमित टीकाकरण का लक्ष्य हासिल न करते तक संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन रोका जा रहा है. विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारी में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी और आगे भी निगरानी व कार्रवाई जारी रहेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
