युवाओं में बढ़ता अवसाद, एक गंभीर सामाजिक चुनौती

भागलपुर युवाओं में बढ़ता अवसाद (डिप्रेशन) आज एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है.

भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट

भागलपुर युवाओं में बढ़ता अवसाद (डिप्रेशन) आज एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है. तकनीकी रूप से सशक्त और आधुनिक दिखने वाली युवा पीढ़ी मानसिक दबाव और तनाव का भी तेजी से सामना कर रही है. हाल के वर्षों में युवाओं के बीच अवसाद के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है.

भागलपुर निवासी मनोवैज्ञानिक डॉ दामिनी कुमारी के अनुसार, बेहतर शिक्षा, आकर्षक नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा की प्रतिस्पर्धा में युवा लगातार दबाव महसूस कर रहे हैं. अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर निराशा, हताशा और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं, जो धीरे-धीरे अवसाद का रूप ले सकती हैं. सोशल मीडिया भी युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला बड़ा कारण बन गया है. दूसरों के जीवन से अपनी तुलना करना, लाइक्स और फॉलोअर्स की चिंता तथा ऑनलाइन स्वीकृति की चाह तनाव बढ़ा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक कलह, आर्थिक समस्याएं, बेरोजगारी, प्रेम संबंधों में असफलता और सामाजिक अलगाव भी अवसाद के प्रमुख कारण हैं. लगातार उदासी, किसी काम में रुचि की कमी, नींद और भूख में बदलाव, थकान तथा आत्मविश्वास में कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं. समय रहते पहचान और उचित परामर्श से इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं से नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद अपनाने की अपील की है तथा जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सलाह लेने की सलाह दी है.

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Author: ATUL KUMAR

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