भागलपुर: राघोपुर तटबंध का 30 मीटर हिस्सा टूटा, अब 6.50 KM लंबे बांध पर मंडराया खतरा; फरक्का बराज के खुले गेट

भागलपुर के राघोपुर में गंगा की विकराल धारा ने काजीकोरैया-राघोपुर तटबंध का 30 मीटर हिस्सा तोड़ दिया है. अब प्रशासन के सामने 6.50 किलोमीटर लंबे तटबंध को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है. फरक्का बराज के सभी गेट खोलकर पानी की निकासी तेज की गई है.

भागलपुर जिले के गोपालपुर अंतर्गत राघोपुर में गंगा की बदलती धारा ने विकराल रूप ले लिया है. काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल तटबंध का करीब 30 मीटर हिस्सा टूट जाने के बाद अब प्रशासन के सामने सिर्फ इस टूटे हिस्से को भरने की चुनौती नहीं है, बल्कि पूरे 6.50 किलोमीटर लंबे तटबंध को सुरक्षित बचाने की सबसे बड़ी जंग छिड़ गई है. नदी के बीच बने शोल (रेत के टीले) के कारण धारा का दबाव सीधे तटबंध पर है. बांध टूटने से राघोपुर समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है.

26 जुलाई की चेतावनी से 24 अगस्त की तबाही तक का सफर

राघोपुर तटबंध पर यह खतरा अचानक नहीं आया, बल्कि नदी करीब एक महीने से लगातार इस बांध को चुनौती दे रही थी:

  • शुरुआती चेतावनी: प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जुलाई को डी-नोज के समीप करीब 110 मीटर क्षेत्र में भीषण कटाव हुआ था, जिसे उस समय बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से नियंत्रित कर लिया गया था.
  • कटाव का सिलसिला: 26 जुलाई से 24 अगस्त के बीच कई स्थानों पर कटाव देखा गया. 23 अगस्त की रात ई-नोज के डाउनस्ट्रीम में बचाव कार्य लगातार चलता रहा.
  • टूट गया बांध: तेज कटाव और भारी दबाव के कारण 24 अगस्त की रात करीब दो बजे तटबंध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का लगभग 30 मीटर का हिस्सा पानी में समा गया.

'टूटे बांध' के बाद अब 'बचे बांध' को बचाने की जद्दोजहद

बाढ़ के पानी के फैलाव को रोकने और टूटे हिस्से के दोनों सिरों को सुरक्षित रखने के लिए अब युद्धस्तर पर 'रिंग बांध' का निर्माण किया जा रहा है. बचाव कार्य में एक बड़ी फौज उतार दी गई है:

  • तैनात संसाधन: मौके पर करीब 250 श्रमिक दिन-रात काम कर रहे हैं.
  • भारी मशीनरी: 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन और 2 जेसीबी मशीनों को मोर्चे पर लगाया गया है.
  • बालू के बोरे: कटाव रोकने के लिए भारी संख्या में बालू भरे बोरे (Sandbags) डाले जा रहे हैं.
  • बड़ा सवाल: जब तक गंगा का दबाव बना रहेगा, तब तक यह रिंग बांध कितनी मजबूती से पानी को रोक पाएगा, यह एक बड़ी चिंता का विषय है. यदि धारा दूसरी ओर मुड़ती है, तो 6.50 किमी लंबे तटबंध के अन्य संवेदनशील हिस्सों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

राहत की उम्मीद: खुले फरक्का बराज के सभी गेट

भागलपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और तबाही को देखते हुए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी पहल की गई है:

  • पानी की निकासी: गंगा के जलस्तर को घटाने के लिए बिहार सरकार के आग्रह को मानकर पश्चिम बंगाल सरकार ने फरक्का बराज के सभी गेट (फाटक) खोल दिए हैं, ताकि पानी तेजी से निकल सके.

फिलहाल तीन मोर्चों पर जारी है लड़ाई: प्रशासन की पूरी टीम इस समय तीन बड़े मोर्चों पर एक साथ लड़ रही है— पहला टूटे हिस्से को रोकना, दूसरा फैल चुके पानी से गांवों को डूबने से बचाना और तीसरा बचे हुए तटबंध पर गंगा के दबाव को नियंत्रित करना.


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By Vipin Thakur

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