भागलपुर के खरीक प्रखंड स्थित काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध गंगा के तेज दबाव और कटाव के कारण करीब 30 मीटर लंबाई में टूट गया है. बांध टूटने के बाद राघोपुर गांव की करीब 5011 की आबादी और 1005 घर प्रभावित हुए हैं, जबकि आसपास के करीब 10 गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने युद्धस्तर पर बचाव और बाढ़ संघर्षात्मक कार्य शुरू किया है. टूटे हिस्से पर रिंग बांध बनाने के साथ 250 मजदूर, 20 नाव, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन और दो जेसीबी तैनात किए गए हैं.
तेज कटाव के बाद 30 मीटर में टूटा बांध
काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर रविवार रात से ही बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया जा रहा था. इसके बावजूद गंगा के तेज दबाव और लगातार कटाव के कारण राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध करीब 30 मीटर लंबाई में टूट गया. विभाग का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने का काम तेजी से किया जा रहा है.
टूटे हिस्से पर शुरू हुआ रिंग बांध का निर्माण
बांध के टूटे हिस्से के दोनों सिरों को सुरक्षित रखने और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए रिंग बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है. मौके पर करीब 250 लाख बालू भरे बोरे, 20 नाव, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन और दो जेसीबी उपलब्ध कराए गए हैं. करीब 250 श्रमिक दिन-रात बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में जुटे हुए हैं.
6.50 किलोमीटर लंबे बांध पर पहले से था दबाव
काजीकोरैया-राघोपुर बांध की लंबाई करीब 6.50 किलोमीटर है और इस पर पांच नोज बने हुए हैं. विभाग के अनुसार नदी के बीच शोल बनने के कारण मानसून की शुरुआत से ही बांध पर दबाव बना हुआ था.
26 जुलाई को डी-नोज के समीप करीब 110 मीटर क्षेत्र में कटाव हुआ था, जिसे 27 जुलाई की सुबह चार बजे तक नियंत्रित कर लिया गया था. इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से के सुदृढ़ीकरण के लिए 110 मीटर में छह मीटर चौड़ा एनसी बेस, बंबू रोल और हाथी पांव का काम कराया गया. डी-नोज के अपस्ट्रीम में 250 मीटर क्षेत्र में 25 स्लोपिंग बेड बार भी बनाए गए.
पालीवार अभियंताओं की तैनाती, लगातार हो रही निगरानी
26 जुलाई से 24 अगस्त तक बांध के विभिन्न रीच में कटाव रोकने के लिए लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया. मौके पर एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं के अलावा पालीवार एक सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंताओं की टीम तैनात है. एक अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता भी मौके पर मौजूद हैं.
17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम भी स्थल पर कैंप कर रही है. जिलाधिकारी, एसएसपी नवगछिया, एसडीओ नवगछिया और अपर समाहर्ता आपदा स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं.
फरक्का बराज से जलनिकासी बढ़ाने की कोशिश
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए फरक्का बराज से शीघ्र जलनिकासी के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया. मुख्यमंत्री की ओर से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया गया. स्थिति की जानकारी लेने के लिए विभागीय दल को फरक्का भेजा गया, जिसके बाद बराज के गेट खोल दिए गए.
राघोपुर गांव के 5011 लोग प्रभावित
बांध टूटने से खरीक प्रखंड का राघोपुर गांव सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. गांव की करीब 5011 की आबादी और 1005 घरों पर बाढ़ का असर पड़ा है. इसके अलावा काजीकोरैया, खैरपुर, लोदीपुर, बहतरा सहित करीब 10 गांवों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
राघोपुर के वार्ड संख्या 05, 06, 07, 08 और 09 में स्थिति अधिक प्रभावित बताई जा रही है. प्रशासन की ओर से इन इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी रखा गया है.
चार जगहों पर सामुदायिक किचन से भोजन
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए चार स्थानों पर सामुदायिक किचन संचालित किए जा रहे हैं. प्रशासन के अनुसार रात में प्रभावित परिवारों को सामुदायिक किचन के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया गया.
- राजकीय मध्य विद्यालय, राघोपुर
- काली स्थान, राघोपुर
- दुर्गा स्थान, राघोपुर, वार्ड-09
- सामुदायिक भवन, वार्ड-06
बांध की मरम्मत में देरी बढ़ा सकती है चुनौती
क्षतिग्रस्त हिस्से का रिस्टोरेशन जल्द पूरा नहीं हुआ तो आसपास के गांवों में बाढ़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हालांकि विभागीय टीम लगातार सुरक्षात्मक कार्य में जुटी है और क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है.
ऊर्जा मंत्री बोले, 15 दिनों से चल रहा था काम
ऊर्जा मंत्री शैलेंद्र कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि दियारा क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बांध को नुकसान पहुंचा है. जल संसाधन विभाग की टीम पिछले 15 दिनों से लगातार काम कर रही थी. उन्होंने कहा कि बांध के क्षतिग्रस्त होने का किसी को अनुमान नहीं था. मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से इस क्षेत्र में कटाव की समस्या नहीं हुई थी, हालांकि गंगा किनारे होने के कारण यहां कटाव का खतरा हमेशा बना रहता है.
विक्रमशिला पुल को लेकर भी मंत्री ने दी जानकारी
विक्रमशिला पुल के संबंध में ऊर्जा मंत्री ने कहा कि लोगों की मांग को देखते हुए बेली ब्रिज खोलने का समय बढ़ा दिया गया है. बाढ़ का पानी कम होने के बाद विक्रमशिला पुल का काम शुरू कराया जाएगा. लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवागमन सुचारु रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है.
