Bhagalpur News : बाइक-कार का चालान काटने में पुलिस व्यस्त, शहर में फिर से जुगाड़ गाड़ियां हावी

वर्ष 2020 में तत्कालीन ट्रैफिक डीएसपी की सख्ती के बाद शहर से गायब हो चुकी थी जुगाड़ गाड़ियां

= वर्ष 2020 में तत्कालीन ट्रैफिक डीएसपी की सख्ती के बाद शहर से गायब हो चुकी थी जुगाड़ गाड़ियां- जुगाड़ गाड़ियों के परिचालन की वजह से एक बार फिर से बढ़ी हादसों की आशंका.

संवाददाता, भागलपुर

वर्ष 2020 के बाद शहर की सड़कों से लगभग जुगाड़ गाड़ियां लुप्त हो चुकी थी. एक बार फिर से यातायात पुलिस की लापरवाही और अनदेखी से जुगाड़ गाड़ियों का परिचालन धड़ल्ले से हो रहा है. जोकि शहर में सड़क हादसों को न्योता दे रहा है. शहर के मुख्य चौक-चौराहों और मार्गों से लेकर मुख्य बाजार और छोटी दुकानों तक में जुगाड़ गाड़ियां धड़ल्ले से सामानों को लाद कर परिचालन कर रही है. उल्लेखनीय है कि 2017 से पूर्व से ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था. वर्ष 2016 में आयोजित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार की बैठक में भागलपुर-बांका जिले की सड़कों पर जुगाड़ गाड़ियों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था. तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त आरएल चौंग्थू ने भागलपुर व बांका के जिलाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में इसका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था.दोनों जिलों की पुलिस के अलावा डीटीओ और एमवीआइ को इसकी जिम्मेदारी दी गयी थी, पर यहां परिचालन को रोकना तो दूर भागलपुर यातायात सहित थानों की पुलिस तक ऐसे वाहनों की जांच तक नहीं कर रही है. भागलपुर शहर से लेकर भागलपुर-अमरपुर, भागलपुर-बौंसी, भागलपुर-कहलगांव और भागलपुर-सुल्तानगंज मुख्य मार्गों तक पर जुगाड़ गाड़ियां दौड़ रही है. वर्ष 2020 में तत्कालीन भागलपुर यातायात डीएसपी आरके झा ने अभियान चलाकर जुगाड़ गाड़ियों को पकड़ना शुरू किया था. जिसके बाद शहर सहित ग्रामीण इलाकों में दो सौ से अधिक जुगाड़ गाड़ियों को जब्त किया गया. जोकि आज भी पुलिस केंद्र और थानों में सड़ रही है.

क्याें खतरनाक हैं जुगाड़ गाड़ियां

जिला के विभिन्न मैकेनिक से लेकर वेल्डिंग गैरेज चलाने वाले इन जुगाड़ गाड़ियों का निर्माण करते हैं. अधिकांश जुगाड़ गाड़ियां झारखंड और पश्चिम बंगाल से खरीद कर लायी जा रही है. इन गाड़ियों में दूसरे वाहनों, जेनरेटर आदि का इंजन फीट कर इसमें डाला और स्टीयरिंग बनाया जाता है. कई जगहों पर इन जुगाड़ गाड़ियों में लोगों के बैठने के लिए सीट भी लगायी जाती है. जुगाड़ गाड़ियों के न तो कागजात होते हैं और न ही कोई रजिस्ट्रेशन नंबर. न ही मोटरयान अधिनियम के तहत इनका निर्माण किया जाता है. ऐसे में किसी भी तरह का हादसा होने के बाद इन जुगाड़ गाड़ियों का पता लगा पाना नामुमकिन जो जाता है. भागलुपर पुलिस जिला में कई ऐसे मामले भी सामने आये हैं जिसमें पकड़ी गयी जुगाड़ गाड़ियों में चोरी की बाइकों और वाहनों के इंजन का इस्तेमाल किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SANJIV KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >