bhagalpur news. नये आपराधिक कानून से सुलभ न्याय मिलने की जगी है उम्मीद

आदमपुर स्थित प्रभात खबर कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग में वरीय अधिवक्ता मुकेश कुमार ठाकुर ने पाठकों को नए आपराधिक कानून के बारे में जानकारी दी.

आदमपुर स्थित प्रभात खबर कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग में वरीय अधिवक्ता मुकेश कुमार ठाकुर ने पाठकों को नए आपराधिक कानून के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानून से आम जनता को न्याय सुलभ होने की उम्मीद है. इन कानूनों में कई प्रावधान ऐसे हैं जो केस की सुनवाई को तेज करने और पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय दिलाने में मदद करेंगे. बताया कि नए कानून में डिजिटल सबूत, तकनीकी जांच और त्वरित कार्यवाही पर विशेष जोर दिया गया है. इससे पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी. कहा कि पहले कई मामलों में सबूत के अभाव या लंबी प्रक्रिया के कारण पीड़ित को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नए प्रावधान इस समस्या को काफी हद तक दूर किया गया है. उन्होंने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा देना नहीं, बल्कि समाज में कानून का सम्मान बढ़ाना और पीड़ित को राहत दिलाना भी है. 1.

प्रश्न – वर्ष 2022 के दिसंबर में मैं शहर में एक वॉशिंग मशीन की खरीददारी की थी. उस वक्त बताया गया था कि उसे तीन वर्ष की वारंटी दी जा रही है और कुछ पैसे देकर इसे छह वर्ष तक कर सकते हैं. मैंने छह वर्ष तक वारंटी की सुविधा ले ली, लेकिन इन दिनों जब मशीन खराब हो गयी, तो मैं दुकान पर गया. पता चला कि कंपनी की तरफ से मिलने वाली वारंटी महज दो साल की थी और पैसे देकर उसने तीन साल की वारंटी ली थी, वह पीरियड भी प्रारंभ नहीं हुआ. इसके लिए आपको चार माह का इंतजार करना होगा.

मो जिशान, माैलानाचक, भागलपुर.

उत्तर – आप सभी साक्ष्यों के साथ उपभोक्ता अदालत में वाद दायर करें, निश्चित रूप से आपके साथ न्याय होगा. कोई भी कंपनी या संस्थान बिक्री के समय किये गये अपने लिखित वादे से मुकर नहीं सकता है.

2.

प्रश्न – बिहार पुलिस में वाहन चालक की वेकेंसी आयी है. इसमें आपराधिक मामलों की जानकारी मांगी गयी है. क्या यह देना जरूरी है.

रवि कुमार, भागलपुर

उत्तर – हां, आपको वेकेंसी के फॉर्म में किसी भी तरह की जानकारी को छिपाना नहीं चाहिए. आपको स्पष्ट रूप से मांगी गयी जानकारी का उल्लेख करना चाहिए. अगर इस तरह की जानकारी कोई छिपाता है तो बाद में उसकी उम्मीदवारी रद्द भी हो सकती है.

3.

प्रश्न – मेरी जमीन पर एक कंपनी ने टॉवर लगाया था. जिसका लीज एग्रीमेंट अब समाप्त हो गया. कंपनी को कई बार नोटिस किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. जब उसने टॉपर को हटाने का प्रयास किया, तो स्थानीय पुलिस द्वारा रोक दिया गया, क्या करें.

इंद्रजीत सहाय, भगवान पुस्तकालय, भागलपुर.

उत्तर – आपने लीज किया है, तो जरूर एग्रीमेंट किया होगा. अब लीज समाप्त हो गया तो आप मामले को न्यायालय में ले कर जाएं. न्यायालय से प्राप्त आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.

4.

प्रश्न – मेरी पत्नी तीन साल से मायके में है और वह आना नहीं चाहती है. जबकि हमें एक बच्ची भी है, जो मेरे साथ रह रही है. क्या करना चाहिए.

प्रीतम कुमार, भागलपुर.

उत्तर – आप परिवार न्यायालय में अपना वाद दायर करें. निश्चित रूप से कानूनी रूप से फैसला होगा.

5.

प्रश्न – मैंने एक बैंक से गोल्ड लोन लिया. बीच में मैंने बैंक को बता कर किस्त नहीं दिया. बैंक ने मेरे एक लाख मूल्य के जेवर की नीलामी महज 64 हजार रुपये में कर दी. अब बैंक द्वारा उल्टे बांकी के पैसे मांगे जा रहे हैं.

रवि कुमार, पुरैनी जगदीशपुर

उत्तर – आप स्थायी लोक अदालत में जाएं. इस तरह के मामलों में वहां बखूबी सुनवाई होती है. उम्मीद है आपको न्याय मिलेगा.

6.

प्रश्न – मेरी पुत्री की शादी के पांच साल हो गये. उसका पति प्राइवेट कंपनी में काम करता है. इन दिनों उसकी पुत्री को मायके से पैसे लाने के नाम पर तरह-तरह की प्रताड़ना दी जा रही है.

एक पाठक, तिलकामांझी, भागलपुर

उत्तर – मामला दहेज प्रताड़ना का बनता है. आप सर्वप्रथम मामले की सूचना स्थानीय थाने को दें और जरूरत पड़े तो केस दर्ज करें.

7.

प्रश्न – बहन की शादी 20 वर्ष पहले हो गयी है. अब उसे पैतृक संपत्ति से लोभ हो गया है. अपना हिस्सा लेती भी नहीं है और न ही किसी तरह का समाधान करती है. हमेशा विवाद खड़ा करती है.

एक पाठक, लोदीपुर, भागलपुर.

उत्तर – आप सिविल सूट करें और बहन का हिस्सा अलग करके अपना भी हिस्सा अलग करवा लें. निश्चित रूप से विवाद का समाधान हो जाएगा.

8.

प्रश्न – पिछले दिनों परिवार में ही झगड़ा हुआ था. मामला थाने तक पहुंच गया, लेकिन अब दोनों पक्ष सुलह करना चाहते हैं.

वीरेंद्र राय, गोलाघाट, भागलपुर.

उत्तर – आप स्थायी लोक अदालत जाकर अपने मामले को रख सकते हैं. निश्चित रूप से दोनों पक्षों के बीच कानूनी रूप से सुलह हो जाएगा.

शराबबंदी के बाद आया है सामाजिक सुधार

प्रभात खबर लीगल काउंसलिंग सत्र में वरीय अधिवक्ता ने कहा कि शराबबंदी कानून से बिहार में सामाजिक सुधार देखने को मिला है. भले ही कुछ लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन कर रहे हों, लेकिन अब वह खुलेआम शराब पीकर समाज में हंगामा या दूसरों को डराने-धमकाने जैसी हरकत नहीं कर पाते. इससे पारिवारिक विवादों और सड़क हादसों में भी कमी आई है. कहा कि शराबबंदी जैसा कदम बिहार जैसे राज्य के लिए आवश्यक था, जहां शराब के कारण कई सामाजिक और आर्थिक समस्याएं गहराती जा रही थी. इस कानून ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के जीवन पर सकारात्मक असर डाला है, क्योंकि घरेलू हिंसा और आर्थिक शोषण के मामलों में कमी आयी है. अधिवक्ता ठाकुर ने यह भी कहा कि इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस को सख्ती से अमल करवाना चाहिए. साथ ही शराबबंदी के लाभों के बारे में जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाना जरूरी है, ताकि लोग स्वेच्छा से इसके पालन के लिए प्रेरित हो. कहा कि कानून तभी सफल होगा जब समाज इसे स्वीकार कर सहयोग करेगा.

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Author: ATUL KUMAR

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