Bhagalpur News. एतकाफ से मस्जिदों में बढ़ी रौनक, शबे कद्र पाने के लिए मोमिन बेकरार : सज्जादानशीन

एतकाफ से मस्जिदों की रौनक बढ़ी.

माहे रमजान का अंतिम अशरा चल रहा है. मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. सुन्नत-ए-नबवी पर अमल करते हुए बड़ी संख्या में रोजादार एतकाफ में बैठ गये हैं. शबे कद्र की अजीम नेमत हासिल करने के लिए दिन-रात इबादत में मशगूल हैं. खलीफाबाग स्थित शाही जामा मस्जिद में भी दो दर्जन से ज्यादा लोग एतकाफ की सआदत हासिल कर रहे हैं. ऐसे में मस्जिद का माहौल रूहानी व नूरानी नजर आ रहा है. खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादानशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि मौजूदा फितनों व माद्दापरस्ती के दौर में जो लोग दुनियावी व्यस्तताओं से अलग होकर सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए एतकाफ जैसी अजीम सुन्नत को जिंदा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एतकाफ इंसान को अल्लाह के करीब करता है. उसके दिल में रूहानियत, तकवा और बंदगी का जज्बा पैदा करता है. कहा कि शाही जामा मस्जिद लगभग चार सौ साल पुरानी एक ऐतिहासिक मस्जिद है. यहां हर दौर में लोग एतकाफ की सुन्नत को जिंदा रखते आये हैं. यह रिवायत आज भी जारी है. सज्जादानशीन ने शबे कद्र की फजीलत बयान करते हुए कहा कि कुरआन शरीफ में अल्लाह ने फरमाया कि शबे कद्र हजार महीनों से बेहतर है. यानी जो शख्स खुलूस व खुशू के साथ इस रात में इबादत करता है. उसे मानो चौरासी साल से ज्यादा इबादत का सवाब मिलता है. मोमिन रमजान के आखिरी अशरे में शबे कद्र की तलाश में खासतौर पर इबादत, तिलावत-ए-कुरआन, जिक्र और नफ्ल नमाज का एहतमाम करते है.

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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