मारवाड़ी कॉलेज में अमर शहीद तिलकामांझी की जयंती पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. मौके पर मुख्य वक्ता डाॅ रविशंकर कुमार चौधरी ने कहा कि 1857 की क्रांति से लगभग 80 वर्ष पूर्व ही तिलकामांझी ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी फूंक दी थी. तिलकामांझी ने अंग्रेजी शासन का खजाना लूटकर गरीबों में बांटा, जिस कारण वह गरीबों के मसीहा कहलाये. उनके नेतृत्व में वनवासियों का संथाल हूल शुरू हुआ, जिसने अंग्रेजों और उनके समर्थक सामंतों की नींव हिला दी. वहीं, प्राचार्य प्रो संजय कुमार झा ने तिलकामांझी के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर प्रकाश डाला. कहा कि उनके विचार आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं. उनसे देशभक्ति की भावना सीखने की आवश्यकता है. इस अवसर पर डाॅ प्रभात कुमार, सहायक प्राध्यापक अक्षय रंजन, डॉ भवेश कुमार, डाॅ संगीत कुमार, डाॅ आशीष कुमार मिश्रा, डाॅ श्वेता, डॉ संजय कुमार जायसवाल, डाॅ स्वस्तिका दास आदि मौजूद थे. दूसरी तरफ राजकीय अनुसूचित जनजाति कल्याण छात्रावास संख्या तीन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर छात्रावास अधीक्षक डॉ दीपक कुमार दिनकर ने कहा कि अमर शहीद तिलकामांझी त्याग, बलिदान और संघर्ष के पर्याय थे.
bhagalpur news. गरीबों के मसीहा थे अमर शहीद तिलकामांझी

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मारवाड़ी कॉलेज में अमर शहीद तिलकामांझी की जयंती पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया