भागलपुर. मंजूषा कला के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को सीधे बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में मंजूषा हटिया-सह-मंजूषा लोक कला प्रदर्शनी के चौथे संस्करण का आयोजन किया गया. जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर और भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोक कलाकारों ने मंजूषा कला से जुड़ी विभिन्न कलाकृतियों का प्रदर्शन किया. कला प्रेमियों और आम लोगों ने कलाकारों की कृतियों को देखा और उनकी कला को करीब से समझा.
कलाकारों को सीधे कलाप्रेमियों तक पहुंचने का मौका
कार्यक्रम जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन के नेतृत्व में आयोजित किया गया. उन्होंने कहा कि मंजूषा हटिया के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित करने के साथ उन्हें सीधे कलाप्रेमियों और आम लोगों को बेचने का अवसर मिल रहा है. इससे कलाकारों को अपनी कला के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल रही है.
हर माह के पहले रविवार को लगेगी मंजूषा हटिया
मंजूषा हटिया प्रत्येक माह के पहले रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित की जाती है. इसका समय सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित है. खास बात यह है कि इसमें शामिल होने वाले कलाकारों से प्रदर्शनी या स्टॉल लगाने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता. इससे स्थानीय कलाकारों को बिना अतिरिक्त खर्च के अपनी कृतियों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है.
चौथे संस्करण का डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया उद्घाटन
मंजूषा हटिया के चौथे संस्करण का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के पूर्व कुलपति सह निदेशक, प्लानिंग डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी के संजय चौधरी, शिक्षाविद् राजीवकान्त मिश्रा समेत कई गणमान्य व्यक्ति, कलाकार और कला प्रेमी मौजूद रहे.
अंग संस्कृति की विशिष्ट कला परंपरा है मंजूषा
उद्घाटन के बाद डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अंग संस्कृति की मंजूषा लोक कला अत्यंत प्रभावशाली और विशिष्ट कला परंपरा है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोगों को मंजूषा कला के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है. ऐसे आयोजनों की निरंतरता से हर माह नए लोग इस कला से जुड़ रहे हैं और इसकी पहचान व्यापक हो रही है.
संरक्षण के साथ बाजार उपलब्ध कराने की पहल
मंजूषा हटिया का उद्देश्य केवल लोक कला का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि कलाकारों को अपनी कृतियां बेचने के लिए सीधे बाजार उपलब्ध कराना भी है. नियमित आयोजन से कलाकारों और कला प्रेमियों के बीच सीधा संपर्क बन रहा है. इससे मंजूषा कला के संरक्षण और कलाकारों की आजीविका को एक साथ मजबूत करने की दिशा में पहल हो रही है.
