bhagalpur news. एकांतवास से बाहर आये भगवान जगन्नाथ, आज निकलेगी भव्य रथयात्रा

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा गुरुवार को 15 दिनों के बाद एकांतवास से भगवान जगन्नाथ बाहर आये और भक्तों को दर्शन दिया.

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा गुरुवार को 15 दिनों के बाद एकांतवास से भगवान जगन्नाथ बाहर आये और भक्तों को दर्शन दिया. शुक्रवार को अनुष्ठान के बाद भव्य तरीके से गाजे-बाजे के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जायेगी. इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गयी. शहर के नया बाजार सखीचंद घाट रोड, गिरधारी साह हाट, बाटा गली व चंपानगर-नाथनगर स्थित जगन्नाथ मंदिर व ठाकुरबाड़ी से रथयात्रा निकाली जायेगी. नया बाजार जगन्नाथ मंदिर के पंडित सौरभ मिश्रा ने बताया कि यहां से शुक्रवार को संध्या 5:30 बजे पंडित समीर कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पुष्प वर्षा एवं गाजे बाजे के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जायेगी. 11 पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान जगन्नाथ का शृंगार किया जायेगा. फूल माला से सजाकर आरती व मिठाई आदि का भोग लगाया जायेगा. नगर भ्रमण के लिए रथ में रस्सी लगा दी गयी है. रथयात्रा नया बाजार से बूढ़ानाथ चौक, खलीफाबाग चौक, वेरायटी चौक, स्टेशन चौक होते हुए पुन: नया बाजार स्थित मंदिर में पूरी होगी. पंडित आनंद मिश्रा ने बताया कि द्वितीया तिथि को अपनी मौसी के घर रथ पर विराजमान होकर भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ जाते हैं और नौ दिनों तक रहते हैं. सदियों पुरानी रथ यात्रा की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है. रथयात्रा को लेकर कैलाशनाथ वाजपेयी, हिमांशु कुमार, प्रदीप श्रीवास्तव, चंद्रशेखर पांडेय, रंजीत मंडल, गोविंद शर्मा, विकास शर्मा आदि लगे हैं. वाजपेयी हिमांशु कुमार, आनंद मिश्रा, प्रदीप श्रीवास्तव, चंद्रशेखर पांडे, रंजीत मंडल, गोविंद शर्मा, विकास शर्मा आदि रहेंगे. आज सुबह चार बजे शुरू होगी पूजा सूजागंज मुख्य बाजार स्थित बाटा गली के सामने स्थित जगन्नाथ मंदिर से भी पंडित सुशील मिश्रा एवं मुकेश मिश्रा के नेतृत्व में जगन्नाथ प्रभु की रथ यात्रा शुक्रवार को निकाली जायेगी. पूजा-अर्चना सुबह चार बजे से शुरू होगी. साढ़े चार बजे भगवान को विशेष अन्न भोग अर्पित किया जायेगा. यह एकमात्र दिन होता है जब सुबह अन्न भोग लगाया जाता है. भोग में चावल, दाल, सब्जी, मीठा पुलाव और खीर शामिल रहेगा. सुबह पांच बजे से सर्वदर्शन सुलभ कर दिया जायेगा. दोपहर 12 बजे तक पूजा के बाद पट बंद कर दिये जायेंगे. इसके उपरांत भगवान के विग्रहों को रथ पर विराजमान किया जायेगा. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ होगा, फिर मंगल आरती व रस्सा बंधन के साथ रथ यात्रा शुरू होगी.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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