-भागलपुर समेत 24 जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा करेंगे मुख्य सचिव
भागलपुर समेत राज्य के 24 जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निर्माण की प्रगति की समीक्षा अगले सप्ताह मुख्य सचिव करेंगे. इसे लेकर उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव ने डीएम से भू-अर्जन से संबंधित रिपोर्ट तलब की है. वहीं भागलपुर उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने अपर समाहर्ता व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से यह रिपोर्ट मांगी है, ताकि मुख्य सचिव को यह बताया जा सके कि योजना की अपडेट स्थिति क्या है. गोराडीह प्रखंड के मोहनपुर में 96.89 एकड़ जमीन पर औद्योगिक कॉरिडोर का निर्माण होगा. इसके लिए आर्थिक सामाजिक अध्ययन (एसआइए) कराने की तैयारी पूरी हो चुकी है. एसआइए के लिए एलएन मिश्रा आर्थिक अध्ययन एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान को चुना गया है, जो इस परियोजना से होने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन करेगा. इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निर्माण करने के लिए 96.89 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को ट्रांसफर पहले ही कर दी गयी है. इस संबंध में मंत्रिपरिषद की बैठक की गयी थी, जिसमें ट्रांसफर की स्वीकृति भी दी जा चुकी है. जमीन के नि:शुल्क अंतर्विभागीय ट्रांसफर की सूचना राजस्व व भूमि सुधार के सचिव जय सिंह ने महालेखाकार समेत भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त व जिलाधिकारी को दी थी. इससे पहले जमीन ट्रांसफर करने का प्रस्ताव जिलाधिकारी ने प्रमंडलीय आयुक्त को भेजा था, जहां से राजस्व विभाग को भेजा गया था. भागलपुर के अलावा सीतामढ़ी, वैशाली, मधुबनी, रोहतास, नवादा, अरवल, मुंगेर, नालंदा, कटिहार, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, सुपौल, सीवान, सहरसा, बेगूसराय, पटना, मधेपुरा, शेखपुरा, शिवहर, दरभंगा, पूर्णिया, भोजपुर व गया में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाये जायेंगे.मुख्यमंत्री ने एक फरवरी को की थी घोषणा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गत एक फरवरी को प्रगति यात्रा पर भागलपुर आये थे. इस दौरान उन्होंने कई घोषणाएं की थी. इसमें इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निर्माण की घोषणा भी शामिल थी. इसके बाद गोराडीह में गोशाला की जमीन चिह्नित कर को जिलाधिकारी ने प्रमंडलीय आयुक्त को प्रस्ताव भेजा था. आर्थिक रूप से होगा भागलपुर का विकास वर्तमान में बरारी इंडस्ट्रियल एरिया (बियाडा) है, लेकिन अब यहां इतनी जमीन नहीं बची है कि नये उद्योगों की स्थापना की जा सके. इससे औद्योगीकरण की प्रगति में अवरोध उत्पन्न हो रहा है. सरकार के नये इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना के इस निर्णय से नये-नये उद्योग स्थापित होंगे. रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ इलाका आर्थिक तौर पर समृद्ध भी होगा. वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रोजगार सृजन के लिए औद्योगीकरण की गति तीव्र की जानी जरूरी है.
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