bhagalpur news. स्कूलों में री-एडमिशन फीस लेने पर होगी कार्रवाई, पोशाक-पुस्तक निश्चित स्थान से लेने की नहीं होगी बाध्यता

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने सख्त लहजे में कहा कि स्कूलों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जायेगी

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने सख्त लहजे में कहा कि स्कूलों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जायेगी. यदि किसी संस्थान द्वारा सरकारी निर्देशों की अनदेखी की गयी, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगी. उन्होंने संकेत दिया कि यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस पहल है. यह हिदायत जिलाधिकारी ने प्रस्वीकृत निजी विद्यालयों के संचालक, प्रबंधक और प्राचार्यों को दी है. शनिवार को समीक्षात्मक बैठक टॉउन हाॅल में की गयी. इसमें जिले के प्रमुख निजी स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल रहे. जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया कि विद्यालयों में किसी भी प्रकार का सामाजिक या मानसिक भेदभाव नहीं होना चाहिए. कहा कि स्कूल की पहचान उसके शैक्षणिक परिणाम और विद्यार्थियों के संस्कार से होनी चाहिए. अभिभावकों की ओर से मिल रही शिकायतों का जिक्र करते हुए जिलाधिकारी ने री-एडमिशन फीस के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया. कहा कि यदि छात्र उसी विद्यालय में अगली कक्षा में प्रोन्नत हो रहा है, तो उससे दोबारा प्रवेश शुल्क लेना नियमों के विरुद्ध है.

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाओं पर सख्ती से रोक लगायी जायेगी और दोषी पाये जाने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से नियमों का पालन सुनिश्चित करने और अभिभावकों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की. डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि रि-एडमिशन के नाम पर जो स्कूल फीस वसूल रहा है, उनको कड़ी चेतावनी है कि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो या उल्लंघन साबित होता है तो अधिनियम के तहत एक लाख रुपये दंड अधिरोपित करने का प्रावधान है. प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में समिति है और कार्रवाई होती है. आगामी अपराध पर दो लाख का दंड का प्रावधान है. सभी को कड़ी चेतावनी है कि शिकायत पर वित्तीय दंड देंगे और जो नीति है उसके आगे कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजेंगे. पठन-पाठन सामग्रियां पुस्तक व पोशाक को लेकर जो दुकान व स्थान का निर्धारण किया जाता है और अभिभावकों को वहीं से खरीदने के लिए बाध्य करता है, वह नियम के विरुद्ध है. ऐसा उन्हें नहीं करना है. अभिभावकों के विवेक पर निर्भर करता है कि वह पोशाक-पुस्तक कहां से खरीदे. जहां आसानी से मिले वहां खरीद करेंगे. सिलेबस बार-बार बदलने वाली स्कूलों पर भी विशेष नजर रखी जायेगी. अगर एक ही चैप्टर और कंटेंट है, तो पुस्तक के बदलाव नहीं करनी है. बदलाव के नाम पर अत्यधिक दर वसूल नहीं करनी है. समिति और टीम बनाकर इसकी जांच भी करायी जायेगी.

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी राज कुमार शर्मा की मौजूदगी रही. अधिकारियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट हुआ कि निजी विद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन गंभीर है और निगरानी को और कड़ा किया जायेगा.

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By ATUL KUMAR

ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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