कारगिल विजय दिवस: तिरासी के वीर सपूत हवलदार रतन सिंह की शहादत को सलाम, गर्व से याद करता है पूरा क्षेत्र

Kargil Vijay Diwas : कारगिल विजय दिवस पर तिरासी गांव के वीर सपूत हवलदार रतन सिंह की शहादत को पूरा क्षेत्र गर्व से याद करता है. उनकी बहादुरी और देशभक्ति आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है.

Kargil Vijay Diwas : 26 जुलाई 1999 भारतीय सैन्य इतिहास का वह गौरवशाली दिन है, जब भारतीय सेना ने कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों से दुश्मनों को खदेड़कर तिरंगा लहराया था. इस ऐतिहासिक विजय में गोपालपुर प्रखंड के तिरासी गांव के वीर सपूत हवलदार रतन सिंह ने भी अपनी बहादुरी का परिचय दिया. मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए और हमेशा के लिए अमर हो गए.

शहादत की खबर से गमगीन हुआ था पूरा इलाका

कारगिल युद्ध के दौरान हवलदार रतन सिंह की शहादत की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी. उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए थे. नम आंखों से लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी थी. भारत माता के जयकारों और देशभक्ति के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा था. उस दिन हर व्यक्ति को अपने वीर जवान पर गर्व था.

आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं हवलदार रतन सिंह

कारगिल विजय दिवस पर क्षेत्र के लोगों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने शहीद हवलदार रतन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की. लोगों ने कहा कि उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी. प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि शंकर सिंह अशोक सहित कई लोगों ने उनके बलिदान को नमन करते हुए कहा कि ऐसे वीर सपूतों की वजह से ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं.

शहीदों की स्मृतियों को सहेजने की उठी मांग

क्षेत्रवासियों ने सरकार से मांग की कि कारगिल के वीर शहीदों की स्मृतियों को संरक्षित किया जाए और विद्यालयों व सार्वजनिक संस्थानों में समय-समय पर उनके जीवन और बलिदान पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. उनका कहना है कि नई पीढ़ी को शहीदों के संघर्ष और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराना समय की जरूरत है. तिरासी गांव के हवलदार रतन सिंह की शहादत आज भी केवल उनके गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नवगछिया अनुमंडल और भागलपुर जिले के लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनी हुई है.


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By Vipin Thakur

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