कांवर यात्रा की है प्राचीन परंपरा, बाबा अजगैवीनाथ के दर्शन के बाद ही बाबा वैद्यनाथ का पूजन होता है फलदायी

सावन में आने वाले कांवरिया पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा जल भरकर सीधे बाबाधाम रवाना हो जाते हैं. अजगैवीनाथ मंदिर के स्थानापति महंत प्रेमानंद गिरि ने कहा है कि बाबा अजगैवीनाथ के दर्शन-पूजन के बाद ही बाबा वैद्यनाथ को जलार्पण व पूजन फलदायी होता है.

श्रावणी मेला में कांवर यात्रा की परंपरा सदियों पुरानी है. शनिवार को कच्ची कांवरिया पथ के असियाचक समीप कांवरियों का रैला अनवरत बाबा धाम की ओर जा रहा था. दिन के दो बजे असम, महाराष्ट्र, दिल्ली, टाटानगर के कांवरियों के जत्थे होटल में भोजन कर रहे थे. कांवरिया संगीता देवी ने कहा बाबा वैद्यनाथ को जलार्पण करने से सकल मनोकामना की पूर्ति होती है. देवाधिदेव महादेव धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाने से उतना प्रसन्न नहीं होते, जितना कि उत्तर वाहिनी गंगा जल के एक बूंद से. मनोज बम कहते हैं कांवर यात्रा में न कोई छोटा, न बड़ा, न कोई अमीर और न कोई गरीब होता है, बस सभी कांवरिया होते हैं. शुद्ध मन से सुलतानगंज से जल लेकर देवघर जाकर बाबा वैद्यनाथ को जलार्पण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

पांच सौ वर्ष से गंगा जल बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाया जाता रहा है

पंडित संजीव झा कहते हैं पौराणिक मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने कांवर से जल उठा कर सभी धामों की यात्रा की थी. आनंद रामायण के अनुसार राज्याभिषेक के कुछ दिनों बाद भगवान राम, लक्ष्मण व सीता ने भी कांवर से जल लेकर वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक किया था. ‘सुलतानगंज की संस्कृति’ पुस्तक के लेखक डॉ अभयकांत चौधरी के अनुसार पांच सौ वर्ष से गंगा जल बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाया जाता रहा है.

बाबा लेन्हे चलियो हमरो अपन नगरी

सावन में देवलोक से भी देवगण अदृश्य रूप में सुलतानगंज से कांवर लेकर देवघर की ओर जाते हैं. कांवर की परंपरा त्रेता युग में भी थी. उस समय तीर्थ स्थलों की यात्रा पुत्र अपने माता-पिता को कराते थे. कांवर लेकर जाने वाले कांवरिया सुलतानगंज से देवघर तक 95 किमी की लंबी यात्रा तय कर बाबाधाम पहुंचते हैं. जिसे विश्व का सबसे लंबा मेला कहा जाता है. शिव भक्त, बाबा वैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग पर पर गंगा जल अर्पित कर बाबा आशुतोष से मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं. इसीलिए तो कहते हैं- बाबा लेन्हे चलियो हमरो अपन नगरी….

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बाबा अजगैवीनाथ के दर्शन के बाद ही बाबा वैद्यनाथ का पूजन फलदायी

सावन में आने वाले कांवरिया पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा जल भरकर सीधे बाबाधाम रवाना हो जाते हैं. अजगैवीनाथ मंदिर के स्थानापति महंत प्रेमानंद गिरि ने कहा है कि बाबा अजगैवीनाथ के दर्शन-पूजन के बाद ही बाबा वैद्यनाथ को जलार्पण व पूजन फलदायी होता है. परंपरा के अनुसार कांवरियों को गंगा स्नान के बाद अवश्य ही बाबा अजगैवीनाथ का पूजन करना चाहिए. उसके बाद ही बाबा वैद्यनाथधाम की यात्रा पर निकलना चाहिए. महंत ने बताया कि ब्रह्मीभूत योगीराज महंत श्री श्री 108 हरनाथ भारती को बाबा वैद्यनाथ ने दर्शन देकर आने की मनाही करते हुए अजगैवीनाथ की पूजा करने काे कहा था. ऐसी मान्यता है कि बाबा अजगैवीनाथ के पूजन के बाद बाबा वैद्यनाथ पर जलार्पण करने से समस्त मनोकामना जल्द पूर्ण होती है.

अजगैवीनाथ धाम से शुभंकर

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By Prabhat khabar news desk

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