वरिष्ठ संतों ने किया मंदिर और संपत्तियों का निरीक्षण
Juna Akhara: श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अध्यक्ष महंत मोहन भारती जी महाराज, सचिव शिवानंद सरस्वती जी महाराज सहित कई अन्य संत-महात्मा, थानापति और शिष्य सुलतानगंज स्थित प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर पहुंचे. अपने प्रवास के दौरान अखाड़े के अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ-साथ मंदिर से जुड़ी विभिन्न भू-संपत्तियों और बाग-बगीचों का बारीकी से निरीक्षण किया तथा इसके बेहतर उपयोग के लिए आवश्यक निर्देश दिए.
गुरुकुल और विवाह भवन बनने से आम लोगों को होगा फायदा
अजगैवीनाथ मंदिर के स्थानापति महंत प्रेमानंद गिरी ने जानकारी देते हुए बताया कि निरीक्षण के दौरान संतों के बीच मंदिर की खाली जमीन पर एक गुरुकुल और विवाह भवन के निर्माण का अहम प्रस्ताव रखा गया. महंत ने बताया कि यदि मंदिर परिसर में गुरुकुल और विवाह भवन का निर्माण होता है, तो इससे न केवल स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे, जिससे रखरखाव में आसानी होगी.
वाराणसी (बनारस) की बैठक में लिया जाएगा अंतिम निर्णय
इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर यद्यपि सैद्धांतिक सहमति बन गई है, लेकिन महंत प्रेमानंद गिरी ने स्पष्ट किया कि गुरुकुल और विवाह भवन के निर्माण पर अंतिम और औपचारिक मुहर वाराणसी (बनारस) में होने वाली जूना अखाड़ा की आगामी उच्चस्तरीय बैठक में ही लगाई जाएगी.
जमीन की घेराबंदी और दुकानें विकसित करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान अखाड़ा अध्यक्ष ने मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया. उन्होंने मंदिर की जमीन की तत्काल घेराबंदी करने, पक्की चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) का निर्माण कराने तथा बायपास रोड स्थित मंदिर की कीमती भूमि पर व्यावसायिक दुकानें विकसित करने के संबंध में भी मंदिर प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
Juna Akhara: धार्मिक न्यास बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव
महंत प्रेमानंद गिरी ने बताया कि सभी संत नेपाल से मुजफ्फरपुर होते हुए सुलतानगंज पहुंचे थे और यहां से निरीक्षण के बाद वे वाराणसी के लिए रवाना हो गए. उन्होंने आश्वस्त किया कि जूना अखाड़ा के अध्यक्ष द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का चरणबद्ध तरीके से अक्षरशः पालन किया जाएगा. इसके साथ ही, मंदिर के सर्वांगीण विकास और भूमि संरक्षण से जुड़े इन प्रस्तावों पर जल्द ही बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें पूरी जानकारी दी जाएगी और उनका सहयोग मांगा जाएगा.
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