सुलतानगंज का जर्दालु आम बना देश-दुनिया की पहली पसंद, राष्ट्रपति भवन से विदेशों तक बढ़ी डिमांड

Bhagalpur News : अंग प्रदेश की शान और भागलपुर की पहचान बन चुका सुलतानगंज का जर्दालु आम इस बार अपने बड़े आकार, अनोखी मिठास और तेज सुगंध के कारण खास चर्चा में है. राष्ट्रपति भवन से लेकर विदेशों तक इस खास आम की डिमांड बढ़ गयी है.

सुलतानगंज,भागलपुर से शुभंकर की रिपोर्ट

भागलपुर जिले के Sultanganj का मशहूर जर्दालु आम इस बार बेहतर गुणवत्ता और शानदार स्वाद के कारण सुर्खियों में है. जून के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय तक “अंग की सौगात” पहुंचाने की तैयारी चल रही है. वहीं मॉरिशस, सऊदी अरब, यूएई, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी जर्दालु आम के ऑर्डर आए हैं.

मौसम ने दिया साथ, बेहतर हुआ जर्दालु का आकार

इस बार समय पर हुई बारिश और अनुकूल मौसम ने जर्दालु आम की गुणवत्ता को और बेहतर बना दिया है. किसानों और बागवानों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार आम का आकार बड़ा हुआ है और मिठास भी अधिक है.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी “अंग की सौगात”

महेशी, तिलकपुर और मधुवन नर्सरी के संचालक Ashok Chaudhary ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और देश के कई विशिष्ट लोगों को जर्दालु आम भेजने की तैयारी चल रही है. इसके लिए अधिकारियों और वैज्ञानिकों द्वारा बागानों का निरीक्षण भी किया गया है.

खुशबू ही है जर्दालु की सबसे बड़ी पहचान

सुलतानगंज क्षेत्र की काली दोमट मिट्टी में उगने वाला जर्दालु आम अपनी अनोखी सुगंध और मिठास के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि एक कमरे में रखा आम पूरे घर को महका देता है. इसी खासियत के कारण इसे जीआई टैग भी मिल चुका है.

विदेशों से बढ़ी मांग, मॉरिशस से आया विशेष ऑर्डर

इस बार जर्दालु आम की मांग विदेशों में भी तेजी से बढ़ी है. मॉरिशस, सऊदी अरब, यूएई, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से इसके ऑर्डर मिले हैं. बताया गया कि सऊदी अरब के मशहूर LuLu Group International नेटवर्क के माध्यम से कई देशों में जर्दालु आम भेजने की तैयारी की जा रही है.

“मैंगो लैब” बन रही मधुवन नर्सरी

सुलतानगंज की मधुवन नर्सरी अब “मैंगो लैब” के रूप में पहचान बना रही है. यहां लालमोहन, अरुणिमा, सूर्या, केसर और विदेशी प्रजातियों सहित 50 से अधिक किस्मों पर प्रयोग किए जा रहे हैं. एक ही पेड़ पर कई किस्म के आम उगाने का सफल प्रयोग भी यहां किया गया है.

“बारिश ने इस बार आम को संवार दिया”

मैंगो मैन अशोक चौधरी का कहना है कि इस बार की बारिश जर्दालु आम के लिए वरदान साबित हुई है. उन्होंने बताया कि मई के अंतिम सप्ताह से लेकर 10 जून तक बाजार में जर्दालु आम की अच्छी आवक बनी रहेगी.

अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान बना जर्दालु

सुलतानगंज का जर्दालु आम अब सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. राष्ट्रपति भवन से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक इसकी बढ़ती मांग यह साबित करती है कि स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं है.

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Author: AMIT KUMAR SINH

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