bhagalpur news. सीएस कॉम्प्लेक्स में दखल दिहानी पर रोक, एसडीओ के हस्तक्षेप से 15 दिनों के लिए कार्रवाई स्थगित

शहर के महात्मा गांधी पथ स्थित सीएस कॉम्पलेक्स को न्यायालय के आदेश पर रविवार को भवन को ध्वस्त कर जमीन पर दखल दिहानी कराने मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस की टीम पहुंची थी

शहर के महात्मा गांधी पथ स्थित सीएस कॉम्पलेक्स को न्यायालय के आदेश पर रविवार को भवन को ध्वस्त कर जमीन पर दखल दिहानी कराने मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस की टीम पहुंची थी. सुबह से ही कॉम्पलेक्स के दुकानदारों और पुलिसकर्मियों के साथ टकराव की स्थिति रही. लोगों ने पुरजोर विरोध करते हुए हंगामा किया. टीम के सदस्यों के साथ हाथापाई भी हुई. हालांकि, सख्ती के बाद सभी दुकानों और शहर के नामी डाक्टरों के क्लीनिकों को अधिकांश खाली भी करा लिया गया था, अब दुकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही थी. विवाद के बीच दोपहर बाद मौके पर पहुंचे एसडीओ विकास कुमार ने विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए दखल दिहानी की कार्रवाई पर 15 दिनों तक रोक लगा दी. इसके बाद गठित न्यायिक टीम वापस लौट गयी. शहर के कई नामी चिकित्सकों की क्लीनिक का संचालन इसी कॉम्पलेक्स से होने के कारण दिन भर रोगियों के लौटने का सिलसिला जारी रहा, जबकि दूसरी तरफ दुकान को आनन-फानन में खाली कराने के कारण दुकान के कर्मियों के साथ कई बार टकराव की स्थिति बनी, जिसे सख्ती से निपटा गया. दुकान खाली कराने के बाद जेसीबी से तीन दुकानों के आगे के भाग को क्षतिग्रस्त भी कर दिया गया है. मालूम हो कि अब तक सीएस कॉम्पलेक्स में 20 से अधिक दुकानें हैं, जिसकी बंदोबस्ती और देख-रेख प्रशासनिक स्तर से किया जाता था. दुकानदारों और क्लीनिक के कर्मचारियों ने बताया कि एकाएक खाली करने बोला गया, पूर्व में किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया. कहा कि हमलोग न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उनलोगों को भी उचित समय दिया जाना चाहिए था. सुबह से शाम तक सीएस कॉम्पलेक्स के आस पास माहौल तनावपूर्ण रहा. न्यायालय ने बैजनाथ गुप्ता के पक्ष में दिया था निर्णय न्यायालय के आदेश पर टीम बैजनाथ गुप्ता को जमीन पर दखल दिहानी कराने पहुंची थी. बैजनाथ गुप्ता के अधिवक्ता आनंद कुमार सिंह ने बताया कि वादी ने 1998 में कोर्ट में टाइटल सूट किया था. उक्त जमीन वर्ष 1978 से 1985 तक चले सर्वे में उन्हें 27 डिसमिल जमीन का मालिकाना हक मिला था. 2011 में न्यायालय ने बैजनाथ गुप्ता के पक्ष में निर्णय दिया था, जिसके बाद सरकार की ओर से प्रथम अपील को न्यायालय ने खारिज कर दिया था. इस बीच कोर्ट से दखल दिहानी का आदेश आया, जिसका पालन किया जा रहा है. जानकारी मिली है कि सरकार की ओर से मामले में द्वितीय अपील भी की गयी है, जिसमें किसी प्रकार का आदेश नहीं आया है. बैजनाथ गुप्ता ने कहा कि उक्त जमीन मेरी पुस्तैनी जमीन है. स्वास्थ्य विभाग के नाम से हो गया था, जिसे फिर से प्राप्त करने में लंबा संघर्ष करना पड़ा. कोर्ट के आदेश पर उन्हें फिर से जमीन दिलायी जा रही है. — दखल दिहानी की कार्रवाई के दौरान लॉ एंड आर्डर की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी, जिसे सामान्य किया गया है. कार्रवाई को 15 दिनों के लिए रोका गया है. सुबह से ही यहां पर असामाजिक तत्वों की उपस्थिति थी, जिसकी सूचना उन्हें मिली थी. हमलोग सभी एक व्यवस्था के तहत काम करते हैं. फिलहाल पहली प्राथमिकता शांति व्यवस्था की है, इसलिए रोक लगाया गया है. उक्त जमीन सिविल सर्जन आवास की जमीन है. जिसके संदर्भ में उच्च न्यायालय में अपील दायर किया गया है. जिसके फलाफल से जैसे ही हमलोगों को कोई सूचना प्राप्त होगी, आपेक्षित कार्रवाई की जाएगी. शहर में जो हो रहा था वह उचित नहीं लग रहा था. मैंने लिखित आदेश जारी किया है. विकास कुमार, सदर एसडीओ, भागलपुर. यह मामला 2011 से चल रहा था. बैजनाथ गुप्ता सरकारी अमीन भागलपुर में थे. 1985 में उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर गैरकानूनी तरीके से जमीन करवा लिया. फिर कोर्ट में वाद दायर किया गया. कोर्ट में उनके पक्ष में आदेश दिया गया. हमलोग अगस्त माह में ही उच्च न्यायालय अपील में गये हैं. उच्च न्यायालय से जो भी आदेश आयेगा पालन किया जाएगा. डॉ अब्दुल रब्बानी, मेडिकल ऑफिसर, सदर अस्पताल

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Author: ATUL KUMAR

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