भागलपुर जिले के बबरगंज थाना क्षेत्र में पारिवारिक हिंसा में घायल एक वृद्ध दंपत्ति को बिना त्वरित कार्रवाई के वापस लौटाना पुलिसकर्मी को भारी पड़ गया. मामले की लिखित शिकायत और जांच के बाद पूर्वी क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) विवेक कुमार ने बबरगंज थाने में तैनात पीटीसी/381 सुरेंद्र सिंह को कर्तव्य में घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
कलयुगी बेटे और बहू पर मारपीट का गंभीर आरोप
हसनगंज, भद्रकाली मंदिर (वार्ड नंबर 44) की रहने वाली ललिता देवी ने आईजी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि 3 अगस्त को उनके बड़े बेटे मंटू विश्वकर्मा और बहू अनुराधा कुमारी ने उनके और उनके पति शंकर लाल विश्वकर्मा के साथ गाली-गलौज व मारपीट की. मारपीट के दौरान शंकर लाल विश्वकर्मा के सिर में गंभीर चोट आई थी, जिससे वे लहूलुहान हो गए थे. घटना के तुरंत बाद ललिता देवी अपने घायल पति को लेकर न्याय की गुहार लगाने बबरगंज थाने पहुंची थीं.
दो बार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, घटना के दिन सावन की सोमवारी को लेकर थाने के अधिकांश अधिकारी विधि-व्यवस्था ड्यूटी में बाहर थे. सुबह करीब 11:30 बजे पीड़ित दंपत्ति थाने पहुंचे, जहां पीटीसी सुरेंद्र सिंह मौजूद थे. उन्होंने घायल को पहले मायागंज अस्पताल जाकर इलाज कराने की सलाह दी. अस्पताल में इलाज कराने के बाद शाम करीब 5:30 बजे ललिता देवी दोबारा अपने पति के साथ थाने पहुंचीं. आरोप है कि सिपाही ने उनसे लिखित आवेदन तो ले लिया, लेकिन मामला दर्ज करने के बजाय अगले दिन आने की बात कहकर दोनों को टरका दिया.
थानाध्यक्ष को अंधेरे में रखने पर आईजी ने लिया कड़ा एक्शन
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सिपाही सुरेंद्र सिंह ने इस गंभीर पारिवारिक हिंसा और वृद्ध के घायल होने की जानकारी बबरगंज थानाध्यक्ष या किसी भी वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी को नहीं दी. आईजी विवेक कुमार ने इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और संवेदनहीनता मानते हुए सुरेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया. निलंबन की अवधि तक उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, भागलपुर तय किया गया है.
