अव्यवहारिक वृद्धि से उद्योग-व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा

नगर निगम की ओर से गैर आवासीय संपत्ति कर में तीन गुना तक वृद्धि अव्यवहारिक है. इससे क्षेत्र के उद्योग व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा और छोटे व्यापारी अपनी दुकान बंद करने को विवश हो जायेंगे.

नगर निगम की ओर से गैर आवासीय संपत्ति कर में तीन गुना तक वृद्धि अव्यवहारिक है. इससे क्षेत्र के उद्योग व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा और छोटे व्यापारी अपनी दुकान बंद करने को विवश हो जायेंगे. उक्त बातें क्रेडाई के अध्यक्ष सह एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कही. मौका था रविवार को बीपी लॉ कार्यालय में इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से नगर निगम द्वारा गैर आवासीय संपत्ति कर में तीन गुना तक वृद्धि के विरोध में बैठक का. बैठक में इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, क्रेडाई बिल्डर एसोसिएशन आदि के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. एक स्वर में वृद्धि का विरोध किया. इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने कहा कि होटल, विवाह भवन, बैंक, नर्सिंग होम आदि पर वर्तमान दर से तीन गुना, उद्योग, गोदाम आदि पर दो गुना, शोरूम, सिनेमा, मॉल, रेस्टोरेंट, कोचिंग आदि पर डेढ़ गुना बढोतरी की गयी, जो किसी भी तरह से व्यावहारिक नहीं है. चेंबर के अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया ने कहा कि यह आमजन तथा व्यवसायियों पर सरकार द्वारा बड़ा कुठाराघात है, जिसका विरोध हर स्तर पर किया जायेगा.

आईएमए के अध्यक्ष डॉ सोमेन चटर्जी ने कहा कि ऐसे किसी बढ़ोतरी से पहले सरकार को सभी क्षेत्र के जानकारों से विचार विमर्श करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि इस वृद्धि से आमजन की कठिनाई बढ़ेगी. विनीत ढानढनिया ने कहा कि किराये पर पहले से चल रहे संस्थानों पर ऐसी वृद्धि से जमीन मालिक के साथ कानूनी विवाद बढ़ेंगे. चेंबर के वरिष्ठ सदस्य रमण साह ने कहा कि यह बगैर सोची समझी वृद्धि है. कई विसंगतियां है. जिसमें सुधार की जरूरत है. इबिया के महासचिव राजीव प्रदीप, अधिवक्ता सुनील कुमार ने भी विरोध जताया. बैठक में यह तय किया गया कि सर्वप्रथम नगर आयुक्त को इस वृद्धि को वापस लेने के लिए पत्र लिखा जायेगा. इसकी प्रति सभी जन प्रतिनिधियों को दिया जायेगा. आरटीआई के तहत ऐसी अप्रत्याशित वृद्धि की सभी जानकारी मांगी जायेगी और फिर पटना हाई कोर्ट में इसके विरोध में रिट दाखिल किया जायेगा. प्रदेश के सभी चेंबर तथा व्यवसायिक संगठनों को भी इस मुहिम में जोड़ा जायेगा. इस मौके पर रूपेश बैद, एसजे वेदांत आदि उपस्थित थे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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