Bhagalpur news नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व छठ, खरना आज

सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ शनिवार से पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया.

सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ शनिवार से पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया. प्रथम दिन नहाय-खाय को लेकर पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर करीब 25 हजार श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया. गेंहू और चावल को धोकर सुखाया गया. श्रद्धालुओं ने कद्दू-भात का प्रसाद ग्रहण कर व्रत की शुरुआत की. छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है, जिसे पवित्रता, आत्मसंयम और नयी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. व्रती विशेष रूप से अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी बना कर भगवान भास्कर और छठ मइया को अर्पित कर रविवार को खरना व्रत संपन्न करेंगी. पर्व को लेकर पूरे शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है. प्रखंड के गनगनिया, कमरगंज, अबजूगंज, तिलकपुर, महेशी, अकबरनगर सहित कई पंचायतों में व्रती और श्रद्धालु छठ की तैयारी में जुटे हैं. बाजार में रौनक देखने लायक है. सैकड़ों अस्थायी दुकानें सज गयी और पूजा सामग्री की खरीदारी पूरे दिन होती रही. सूप, नारियल, फल, दीया, डाला, गेहूं और चावल की बिक्री से बाजार गुलजार रहे. कई श्रद्धालु गंगा स्नान कर जल लेकर देवघर रवाना हुए. नप प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा व स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की है. गोपालपुर में गांव की पृष्ठभूमि में रचे बसे लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ शुरू हुई. व्रती महिलाओं ने मिट्टी के बने नये चूल्हे पर आम की लकड़ी से कददू व भात बना का शुद्ध व सात्विक भोजन परिवार सहित ग्रहण किया. कहगांव में सूर्य उपासना का चार दिवसीय छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ शनिवार से शुरू हो गया.कई दिनों से गंगा घाटों पर छठ व्रतियों की भारी भीड़ गंगा स्नान करने को उमड़ रही है. गंगा स्नान कर मां भागीरथी व अन्य देवी देवताओं की पूजा-अर्चना कर व्रती गंगा जल ले घर पहुंचे, जहां नेम निष्ठा से कद्दू भात भोग लगाकर स्वयं ग्रहण करने के बाद प्रसाद रूप में परिवारजनों के बीच वितरण किया. छठ घाटों पर साफ-सफाई का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. बाजार में लोगों की भीड़ खरीदारी करने को लेकर बढ़ गयी है. महापर्व को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर है. सूर्य उपासना का महापर्व छठ शनिवार को पूरे बिहपुर क्षेत्र को आध्यात्मिक आलोक से आलोकित कर दिया. चार दिवसीय इस पर्व का प्रथम चरण नहाय-खाय से संपन्न हुआ. प्रातःकाल से ही नन्हकार गंगा तट, रामनगर गंगा तट, बिहपुर थाना घाट, जमालपुर घाट, हरियो त्रिमहान घाट और आसपास के गांवों में छठ गीतों की स्वर गूंजीं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. आज रविवार को खरना होगा. दिनभर निर्जला उपवास के पश्चात संध्या बेला में व्रती दूध और गुड़ से निर्मित खीर, रोटी और फल का प्रसाद बना कर चंद्रदेव को अर्घ करेंगी. उसी क्षण से आरंभ होगा छठ का 36 घंटे का निर्जला उपवास, जो उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होता है. छठ व्रतियों का विश्वास है कि यह पर्व परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और संतति की वृद्धि का वरदान देता है. छठ मइया की कृपा से जीवन के क्लेश और रोग-दुःख नष्ट हो जाते हैं तथा आत्मा में प्रकाश का संचार होता है.

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Published by: Jitendra tomar

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