गोपालपुर के लोगों की आदत ले लेगी किसी की जान, सड़क पर मक्का कर रहा खतरे का इशारा

Road Safety Alert : खेतों से निकाले गये मकई के दाने अब सड़कों पर फैलने लगे हैं. किसानों की मजबूरी जहां फसल बचाने की है, वहीं सड़क पर सुखाई जा रहे मक्के राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी बनते जा रहे हैं. लोगों को आशंका है कि लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

गोपालपुर, भागलपुर से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट

Bhagalpur News : गोपालपुर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों किसान सड़क पर मकई की फसल सुखा रहे हैं. कई स्थानों पर सड़क के एक हिस्से में मकई फैलाकर रखी गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.

सड़कों पर फैल रही फसल, बढ़ रही परेशानी

ग्रामीण इलाकों में मकई की कटाई के बाद किसान उसे सुखाने के लिए सड़क का सहारा ले रहे हैं. कई जगहों पर सड़क के बड़े हिस्से में मकई फैला दी गई है, जिससे वाहनों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है. वाहन चालकों को संकरी जगह से गुजरना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है.

दोपहिया चालकों के लिए सबसे ज्यादा जोखिम

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर बिखरे मकई के दाने दोपहिया वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से खतरनाक साबित हो सकते हैं. दानों पर वाहन का पहिया फिसलने से चालक संतुलन खो सकता है और दुर्घटना का शिकार हो सकता है. खासकर बुजुर्ग और युवा बाइक सवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है.

रात में और बढ़ जाता है खतरा

ग्रामीणों के अनुसार रात के समय सड़क पर फैली मकई आसानी से दिखाई नहीं देती. तेज गति से आने वाले वाहन चालक अचानक फसल देखकर ब्रेक लगाते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है. कई बार सामने से आ रहे वाहनों को बचाने के प्रयास में भी हादसे हो सकते हैं.

किसानों की मजबूरी भी है एक कारण

ग्रामीणों का कहना है कि मकई की कटाई के बाद पर्याप्त खुले और सुरक्षित स्थान की कमी के कारण कुछ किसान सड़क को ही फसल सुखाने के लिए उपयोग कर रहे हैं. हालांकि उनकी यह मजबूरी आम लोगों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क पर फसल सुखाने पर रोक लगाने की मांग की है. साथ ही किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता बताई है, ताकि उनकी फसल भी सुरक्षित रहे और सड़क पर चलने वालों की जान भी जोखिम में न पड़े.

जनजागरूकता से ही निकलेगा समाधान

लोगों का मानना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ किसानों को भी जागरूक करने की जरूरत है. सार्वजनिक सड़कों का उपयोग फसल सुखाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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