303 करोड़ की गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट, जमीन अधिग्रहण शुरू, 2028 तक बदल जाएगी भागलपुर रेलवे की तस्वीर

Gonudham Rail Project: गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट, भागलपुर और झारखंड के बीच रेल सफर को तेज और आसान बनाने वाली महत्वाकांक्षी योजना, अब जमीन पर उतर रही है. 303.02 करोड़ की इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू हो गया है, जिसका लक्ष्य 2028 तक पूरा होना है.

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Gonudham Rail Project : भागलपुर और झारखंड के बीच रेल सफर को तेज और आसान बनाने वाली बहुप्रतीक्षित गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरती दिख रही है. 303.02 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सबौर से गोनूधाम तक बनने वाली 13.38 किलोमीटर लंबी बाइपास रेल लाइन न सिर्फ भागलपुर रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम करेगी, बल्कि भविष्य में बिहार और झारखंड की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगी. रेलवे का लक्ष्य है कि इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू हो और वर्ष 2028 तक पूरी परियोजना तैयार हो जाए.

अब इंतजार खत्म, जमीन अधिग्रहण के साथ तेज हुई

कई वर्षों से चर्चा में रही गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट अब अमल की ओर बढ़ रही है. पूर्व रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रोजेक्ट की निगरानी पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत कर रहे हैं. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू किया जा सके.

यह प्रोजेक्ट मालदा मंडल के अंतर्गत आएगी और सबौर से गोनूधाम तक 13.38 किलोमीटर लंबी नई बाइपास रेल लाइन बिछाई जाएगी.

303.02 करोड़ की योजना से कैसे बदलेगी रेल व्यवस्था

इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 303.02 करोड़ रुपये है. नई बाइपास रेल लाइन बनने के बाद भागलपुर रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव काफी कम होगा. अभी कई ट्रेनों को एक ही रूट साझा करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है.

नई लाइन बनने के बाद यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारु होगा. इससे ट्रेनों की समयपालन क्षमता बेहतर होने की संभावना भी बढ़ेगी. रेलवे के लिए माल परिवहन आसान होगा और भविष्य में इस पूरे क्षेत्र में रेल नेटवर्क का विस्तार भी सरल हो सकेगा.

Gonudham Rail Project : बिहार और झारखंड की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया रास्ता

गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है. इसका सबसे बड़ा फायदा बिहार और झारखंड के बीच रेल संपर्क को मिलेगा. रेलवे की योजना भविष्य में इस रेल लाइन को कटरिया रेल लाइन से भी जोड़ने की है. इससे दोनों राज्यों के बीच यात्रा और माल परिवहन दोनों अधिक सुविधाजनक हो जाएंगे.

रेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट पूर्वी बिहार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

गोनूधाम हॉल्ट बनेगा स्टेशन, यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएं

इस रेल प्रोजेक्ट के साथ-साथ गोनूधाम हॉल्ट को भी स्टेशन के रूप में विकसित करने का काम शुरू हो चुका है. फिलहाल यहां मिट्टी भराई का कार्य चल रहा है. स्टेशन बनने के बाद यहां दो प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

इसके अलावा सबौर को भी पूर्ण स्टेशन के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है. इससे स्थानीय यात्रियों को ट्रेनों की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है.

स्थानीय लोगों को क्या होगा फायदा

नई रेल लाइन बनने से भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा आसान होगी. रेल परिचालन बेहतर होने से लोगों का समय बचेगा और माल ढुलाई तेज होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. झारखंड जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

रेलवे से जुड़े विकास कार्यों के कारण निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है.

सांसद के प्रयासों के बाद मिली थी मंजूरी

इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दिलाने के लिए गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे लगातार प्रयासरत रहे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें पत्र भेजकर इस प्रोजेक्ट की मंजूरी की जानकारी दी थी. अब भूमि अधिग्रहण शुरू होने के साथ परियोजना ने वास्तविक गति पकड़ ली है.

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रेलवे अधिकारी ने क्या कहा

पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत ने बताया कि बिहार और झारखंड की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में गोनूधाम रेल प्रोजेक्ट के लिए लगभग 35 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. भूमि अधिग्रहण का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य आगे बढ़ सके.

2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

रेलवे का लक्ष्य है कि भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए और वर्ष 2028 तक पूरी प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाए. यदि तय समय पर काम पूरा होता है तो भागलपुर रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी और पूरे इलाके की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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