भागलपुर में खतरे के निशान से 1.84 मीटर ऊपर बह रही गंगा: सर्वोच्च बाढ़ स्तर से महज 6 सेमी दूर, इंजीनियरों की टीम अलर्ट

भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे स्थिति गंभीर हो गई है. इस्माईलपुर-बिंद टोली में जलस्तर 33.44 मीटर दर्ज किया गया है, जो सर्वोच्च बाढ़ स्तर से सिर्फ छह सेंटीमीटर नीचे है. ब्रह्मोत्तर बांध पर दबाव बढ़ रहा है और ग्रामीण भयभीत हैं.

भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड में गंगा नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है. यह अपने सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (HFL - यानी वह उच्चतम बिंदु जहाँ नदी का पानी सामान्यतः पहुँचता है) के करीब पहुंच गया है, जिससे स्थिति बहुत गंभीर हो गई है. इस्माईलपुर-बिंद टोली सुरक्षा बांध संख्या-7 पर बुधवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 33.44 मीटर दर्ज किया गया. बीते 12 घंटों में नदी के जलस्तर में चार सेंटीमीटर की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद गंगा का स्तर वर्ष 2021 में दर्ज सर्वोच्च बाढ़ स्तर 33.50 मीटर से महज छह सेंटीमीटर नीचे रह गया है. यह स्थिति 2021 की भयानक बाढ़ की याद दिलाती है, जब जलस्तर 33.50 मीटर तक पहुँच गया था, और आज हम उसी खतरे के मुहाने पर खड़े हैं.

जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बांध संख्या-7 पर खतरे का स्तर (यानी वह स्तर जिससे ऊपर जाने पर बाढ़ का ख़तरा माना जाता है) 31.60 मीटर निर्धारित है, जबकि वर्तमान में नदी इस स्तर से 1.84 मीटर ऊपर बह रही है. उफनती गंगा का पानी सीधे तटबंध के निचले हिस्से (टो) को छू रहा है, जिससे सुरक्षा तटबंध पर भीषण दबाव उत्पन्न हो गया है.

ब्रह्मोत्तर बांध पर मंडराता खतरा: ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ी

बांध संख्या-7 पर पानी के विकराल रूप के साथ-साथ क्षेत्र के अतिसंवेदनशील ब्रह्मोत्तर बांध की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है. ब्रह्मोत्तर बांध के कई हिस्सों पर, खासकर जहां तटबंध कमजोर है, बाढ़ का पानी सीधे दबाव डाल रहा है.

गंगा का जलस्तर सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर के करीब पहुंचने से तटवर्ती गांवों के निवासियों में संभावित कटाव और बाढ़ के डर से अफरा-तफरी का माहौल है. "सोचते हैं कि रात में बांध टूट गया तो क्या होगा? हमारे बच्चे, मवेशी, सब बह जाएंगे," गोपालपुर के एक ग्रामीण, रमेश मंडल ने चिंता जताते हुए कहा. रमेश मंडल, जो खरीफ की फसल के लिए धान और मक्का उगाते हैं, और जिनके लिए उनके मवेशी सिर्फ़ जानवर नहीं, बल्कि उनकी रोज़ी-रोटी का अहम हिस्सा हैं, इस बात से सहमे हुए हैं कि कहीं उनका घर न डूब जाए, सालों की मेहनत से पाली उनकी गाय-भैंसें बह न जाएं या उनकी पूरी ज़मीन-जायदाद ख़त्म न हो जाए. ग्रामीणों की रातें जागकर गुजर रही हैं, वे हर पल बांध पर नज़र रखे हुए हैं, उनके मन में अनिश्चितता और डर का साया मंडरा रहा है.

राघोपुर: जलस्तर में हल्की कमी, पर बांध पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

राघोपुर तटबंध के समीप गंगा नदी का जलस्तर बुधवार सुबह छह बजे 34.61 मीटर दर्ज किया गया. हालांकि पिछले 12 घंटे में यहां जलस्तर में दो सेंटीमीटर की मामूली कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद नदी अब भी खतरे के निशान (33.68 मीटर) से 93 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.

यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 34.86 मीटर है, और वर्तमान जलस्तर (34.61 मीटर) इससे केवल 25 सेंटीमीटर कम है. यहां चेतावनी स्तर 32.68 मीटर और खतरे का स्तर 33.68 मीटर है. पानी का स्तर भले ही दो सेंटीमीटर घटा हो, लेकिन तेज़ लहरों का सीधा प्रहार तटबंध के टो पर लगातार जारी है.

जल संसाधन विभाग मुस्तैद, तटबंधों पर गश्त तेज

जल संसाधन विभाग के अधिकारी आश्वस्त करते हैं कि सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं. हालांकि, पानी के ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंचने के कारण, विभाग और जिला प्रशासन अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं और संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं.

इंजीनियरों की टीम कैंप कर संवेदनशील बांधों और बांध के कमजोर हिस्सों की सघन निगरानी कर रही है. किसी भी संभावित ख़तरे से तुरंत निपटने के लिए सैंडबैग और बोल्डर का बैकअप तैयार रखा गया है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा के जलस्तर में फिर से उफान आया, तो बांधों की सुरक्षा को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vipin Thakur

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >