आमतौर पर शरद ऋतु की विदाई के साथ मार्च अंत तक अपने वतन लौट जाने वाले प्रवासी पक्षी इस बार अप्रैल की गर्मी में भी जगतपुर झील (वेटलैंड) में डेरा डाले हुए हैं. यह असामान्य घटना पक्षी प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय तो है ही, साथ ही वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय भी बन गया है. पक्षी विशेषज्ञ और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ डीएन चौधरी पिछले 30 वर्षों से पक्षियों के संरक्षण पर कार्य कर रहे हैं. उनका मानना है कि यह सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का असर है. उनके अनुसार, इस वर्ष अप्रैल में हुई असमय बारिश और मौसम में नमी के कारण इन परिंदों का प्रवास काल बढ़ गया है. ऐसी स्थिति कोरोना काल के दौरान भी देखी गयी थी. प्रवास काल के बढ़ने से इन पक्षियों के अपने मूल देश में जाकर प्रजनन करने की प्रक्रिया में गतिरोध आ सकता है. कैमरे में कैद हुए दुर्लभ पक्षी डॉ चौधरी के शोध छात्र जय कुमार जय ने अपने नियमित सर्वे के दौरान जगतपुर झील में कई प्रवासी प्रजातियों को भोजन तलाशते हुए पाया है. इनमें प्रमुख रूप से गार्गेनी (चैता), ब्लैक-टेल्ड गॉडविट (गूदेरा), ऑस्प्रे (यह शिकारी पक्षी अलास्का से आता है), कॉमन सैंडपाइपर और बड़ी शिल्ही (फलवस व्हिसलिंग डक) शामिल हैं. जय कुमार के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद अब 2026 के अप्रैल में इन प्रवासी बत्तखों का दिखना वेटलैंड की बेहतर होती जैव विविधता को भी दर्शाता है. घटोरा वेटलैंड में भी दिख रही चहल-पहल सिर्फ जगतपुर ही नहीं, बल्कि भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड में स्थित प्रसिद्ध घटोरा वेटलैंड में भी प्रवासी पक्षियों का कलरव सुना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन जलाशयों में भोजन की प्रचुरता और अनुकूल वातावरण पक्षियों को आकर्षित कर रहा है. हालांकि, नियमानुसार इन पक्षियों को समय पर लौट जाना चाहिए, ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास में जाकर वंश वृद्धि कर सकें. फिलहाल, इस पर्यावरणीय बदलाव पर विस्तृत शोध और सर्वेक्षण जारी है.
bhagalpur news. अप्रैल की तपिश में भी जगतपुर झील में चहक रहे विदेशी मेहमान, पक्षी विशेषज्ञ उत्सुक
आमतौर पर शरद ऋतु की विदाई के साथ मार्च अंत तक अपने वतन लौट जाने वाले प्रवासी पक्षी इस बार अप्रैल की गर्मी में भी जगतपुर झील (वेटलैंड) में डेरा डाले हुए हैं.
