कहलगांव प्रखंड से करीब आठ किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव नंदलालपुर से निकल कर इंडिया अंडर-19 वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा रहे बाये हाथ के तेज गेंदबाज किशन कुमार सिंह की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. मध्यम वर्ग के किसान के घर जन्मे किशन कुमार सिंह के पिता सुशील सिंह कभी संसाधनो की कमी से अपने क्रिकेट को आगे नहीं बढ़ा सके, लेकिन कहते हैं अगर जज्बा हो तो हर मुश्किल काम आसान हो जाता है. वह खुद क्रिकेट में ज्यादा कुछ नहीं कर पाये, लेकिन पुत्र ने ऐसा कारनामा किया कि आज हर किसी के जुबान पर उसका ही नाम है. माता रीना सिंह, पिता सुशील सिंह व चाचा मनोज सिंह आज वर्ल्ड कप जीतने के बाद फुले नहीं समा रहे हैं .मां कहती है वर्ल्ड कप फाइनल के दिन सुबह से ही वह टीवी के पास बैठी थी. जब तक की मैच टीम इंडिया ने जीत नहीं लिया. पिता सुशील सिंह पूजा पाठ कर रहे थे. गांव में क्रिकेट की सुविधा नहीं होने से उसे बुआ अपने घर लेकर चली गयी.
पिता ने बचपन में ही बेटे की काबिलियत को देख अपनी बहन के घर नोयडा भेज दिया, जहां किशन ने आशीष नेहरा के एकेडमी में प्रशिक्षण लिया. वह लगातार मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया.किशन के बचपन के दोस्त विकास सिंह आनंद सिंह बताते हैं कि बचपन में ही उसके गेंदों का सामना करना काफी मुश्किल होता था. वह काफी शानदार गेंदबाजी करता था.
प्रभात खबर से बातचीत में किशन कुमार सिंह ने कहा कि वर्ल्ड कप जीत कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, यह एक सपना सच होने जैसा है. अब सीनियर टीम में शामिल हो वर्ल्ड कप जीतने का सपना है.