bhagalpur news. वन गमन, भरत मिलाप और गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन

सुलतानगंज प्रखंड अंतर्गत रघुचक अंधार स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बाबा रामेश्वर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ सह श्रीमद् भागवत कथा भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रही है

सुलतानगंज प्रखंड अंतर्गत रघुचक अंधार स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बाबा रामेश्वर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ सह श्रीमद् भागवत कथा भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रही है. राम कथा के छठे दिन चंडीगढ़ से पधारे राम कथा वाचक कुंदन जी महाराज ने भरत-केवट संवाद, भगवान श्रीराम के वन गमन, पुत्र वियोग में महाराज दशरथ के प्राण त्याग, अयोध्या लौटकर भरत का माता कैकेयी पर क्रोध तथा श्रीराम को मनाने वन की ओर प्रस्थान जैसे मार्मिक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया. साथ ही हनुमान जी के भक्तिपूर्ण चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रामायण त्याग, भक्ति और भ्रातृप्रेम का महान संदेश देती है. वहीं श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन वृंदावन से पधारे कथावाचक शत्रुघ्न जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने पूतना वध, इंद्र के अहंकार और गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की. इस अवसर पर रामेश्वर सेवा समिति के अध्यक्ष सुरेश प्रसाद सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, नंदन सिंह, पंकज सिंह, राम बहादुर सिंह, गौतम सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह, अभय कुमार सिंह, शमशेर सिंह, प्रियांशु कुमार, सूरज कुमार, आयुष कुमार, विराट कुमार, सुभाष शाह, बेरासी यादव, दानी पासवान, श्याम सिंह, पप्पू सिंह, श्रीराम सिंह, जयप्रकाश सिंह आदि मौजूद थे.

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By ATUL KUMAR

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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